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जयगुरूदेव समाचार
Date : 02-Jan-2010
    बाबा जयगुरूदेव जी महाराज मथुरा आश्रम पर ही हैं। मथुरा में ठंड बहुत पड़ रही है। वैसे काफी लोग बाबा जी का नव वर्ष का सन्देश सुनकर अपने-अपने घरों को लौट चुके हैं। फिर भी चहल-पहल और बाबा जी के दर्शन के लिए भागदौड़ मची हुई है। चीनी की सेवा का क्रम जारी है और लोग बाबा जी के हाथ में अपनी सेवाऐं दे रहे हैं। बाबा जी सबके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देते हैं।
    गत वर्ष के अन्तिम दिन यानी 31 दिसम्बर को प्रातः दस बजे जयगुरूदेव निःशुल्क चीनी शर्बत प्याऊ का शुभारम्भ जयगुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के कार्यालय पर आरम्भ हुआ। सभी लोगों ने लाइन लगाकर शर्बत को गृहण किया। यह क्रम सायंकाल तक चलता रहा। कल भी जब लोगों को चीनी का शर्बत पिलाया जा रहा था तो देखा गया कि कुछ लोग शर्बत के प्रसाद को शीशी में भरकर अपने घरों को ले जा रहे हैं। पूछने पर उन्होंने जवाब दिया कि यह शर्बत नहीं अपितु अमृत है। इसके साथ बाबा जी का संकल्प जुड़ा हुआ है और उनका आशीर्वाद है। बाबा जी की जन्मस्थली खितौरा के कुऐं का जल भी अमृत है। बहुत से लोगांे को इसको पीने से अनेक प्रकार के लाभ हुऐ। एक प्रेमी ने कहा कि मेरी पत्नी को कैंसर हो गया था, डाक्टरों ने जवाब दे दिया था। मैंने दो महीने तक उस अमृत जल को पिलाया। फिर डाक्टर के पास गया तो चैकअप करने के बाद डाक्टर हैरान हो गया कि कैंसर रोग समाप्त हो गया था।
    बात आगे बढ़ाते हुऐ उन्होंने कहा कि बाबा जी चीनी सेवा जो ले रहे हैं इसमें बहुत बड़ा राज है। पहला तो यह कि आप देख लीजिऐ कि इस समय चीनी का भाव 45 रूपये किलो है। बाबा जी के प्रेमी चीनी की बरसात करने की होड़ लगाये हुऐ हैं। क्या यह साधारण बात है? अभी वृन्दावन में कुम्भ लगने जा रहा है। हरीद्वार में भी कुम्भ लगेगा। इसमें विदेशों से भी भारी संख्या में लोग आ रहे हैं। हो सकता है कि बाबा जी चीनी शर्बत की प्याऊ वहां भी लगवा दें। उनका निशाना बहुत दूर है। अभी कुदरत का ताण्डव होने जा रहा है।सतयुग के आने की और कलयुग के जाने की तैयारी है और इनकी टक्कर होगी। बाबा जी के शब्दों में ‘‘इस टक्कर में बीसों करोड़ लोगों का सफाया हो जाऐगा। मुझे तो यह लगता है कि बाबा जी द्वारा इस चीनी शर्बत का प्रसाद लोगों को पिलाने मे कोई बहुत बड़ा रहस्य है।
फकीरों के कदमों में झुकती अमीरी
    सत्संग में बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने कहा कि आप सब लोग इतने चिंतित क्यों हैं इस बात को फकीर जानते हैं और महात्मा जानते हैं। हमने जो अच्छा-बुरा कर्म किया उसकी काई हमारे अंतःकरण पर जमती चली गई इसलिए हमारी समझ में कुछ नहीं आता है कि अच्छा क्या है और बुरा क्या है।
    जिधर भी मै जाता हूं, जिधर से निकलता हूं उधर जो भी लोग मिलते हैं एक ही बात कहते हैं कि महाराज की दया कर दीजिए बड़ी तकलीफ है। जब तुम पैदा हुऐ थे, तब कोई बोलता नहीं था कुछ सुनना नहीं था, कुछ समझने लगे और तुम आडम्बर में फंस गऐ। आप इतने फंस गऐ कि आपने क्या गजब का तमाशा बना रखा है कि इस लाफानी दुनियां को दलदल बना दिया उसी में फंसे हुऐ हैं।
    क्या आपको महात्माओं ने उनकी पुस्तकों में यह नहीं बताया था कि इस मनुष्य शरीर में भजन करना और भवसागर रूपी नदी से पार उतरना। आपको कौन पार उतारेगा ? जो खुद पार उतर गया होगा वही आपको पार उतारेगा। आपने न तो महात्माओं की बात समझी न इन्सानियत की बात समझा। आपने किसी को कुछ नहीं समझा। जानवर को जानवर नहीं समझा। चाहे जिसे मार दो, चाहे जिसे काट दो, चाहे जिसे लूट लो, धोखा दे दो। आपने यह भी नहीं समझा कि आपक कर्म लिखे जा रहे हैं उसका फल मय ब्याज के आपको ही भोगना होगा। कोई संत महात्मा, कोई फकीर नहीं भोगेगा।
    अब तक जो कुछ आपने किया अज्ञानता में किया। अब जो समय बचा हुआ है उससे कुछ अपनी जीवात्मा के कल्याण के लिए कर लो। महात्माओं से रास्ता पूछा और भजन में लग जाओ। वो दया करेंगे। जो कुछ अभी तक तुमने किया अच्छा-बुरा उसकी माफी करा देंगे पर अब बुरा मत करना।
    आप किसी फकीर महात्मा के पास जाओ तो वो तुममें शूरता और वीरता भरेंगे, नपंुसकता और हिजड़ेपन को दूर करेंगे। समय बड़ा नाजुक आ रहा है। महात्माओं को मालूम है कि जब कलयुग जाने लगेगा तो यह अपना कर्जा मांगेगा और जब कहोगे कि नहीं दे सकता तो एक ऐसा लप्पड़ मारेगा कि उसमे कितनों का सफाया हो जाऐगा। जो लोग भगवान का भजन करेंगे वह बचे रहेंगे, सुरक्षित रहेंगे।
    आप मेरी बात सबको बता दें। मैं जितना कहंू उतना ही बताना। तुम सोचो कि तुम दुनियां को मना लोगे तो यह तुम्हारा भ्रम है। तुम्हारा बच्चा तुम्हारी बात नहीं मानता, तुम्हारी बीवी नहीं मानती, घर-परिवार वाले नहीं मानते तो दुनियां को क्या मनाओगे? अच्छे काम में हाथ बंटाओ सब लोग सुखी हो जाऐंगे। अपना निशाना बनाकर लग जाओ तो क्या नहीं कर सकते।
    एक वक्त आऐगा जो बड़ा नाजुक है और बड़ा दुखदायी है। तुम सब लोगांे को महात्माओं की, फकीरों की जरूरत पड़ेगी। तुम्हें अपने इक्खलाक को वापस लाना पड़ेगा, उन महापुरूषों के कदमों में झुकना होगा तब तुम्हारी रूह साफ होगी, तब रूह का दरवाजा खुलेगा और खुदा का दीदार होगा। तुम खुदा से जुदा हो गऐ। भगवान से अलग हो गऐ। जो लोग काफिर और पापी हो गऐ उन्हें खुदा का पता न भगवान का पता। उनके आगे तुम अपना दामन फैलात हो और जो महात्मा फकीर सब कुछ दे सकते हैं उनके पास नहीं जाते हो।
    इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े बादशाहों ने राजे महाराजाओं ने संतों और फकरों के दरबार में जाकर शीश झुकाया और राजपाट को लात मारकर लंगोटी लगा ली। अमीर कभी खुदा का भजन नहीं कर सकता। तुम उन अमीरों की तरफ मत देखो। तुम सोचते हो कि वो बहुत सुखी होंगे पर वो तुमसे भी ज्यादा दुखी हैं।
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