| Date : 03-Feb-2010 |  |
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बाबा जयगुरूदेव जी महाराज से कुछ प्रेमी अपनी साधना के विषय में बता रहे थे। बाबा जी ने सबकी बातों को सुना और कहा कि यह जीते जी मरने की साधना है। विघ्न-बाधाऐं आऐंगी और घबराना अथवा डरना नहीं चाहिऐ। गुरू अन्तर में बराबर सम्हाल करते रहते हैं। महात्माओं ने कहा है कि साधक जीते जी मौत की गुत्थी सुलझा लेता है। इसलिए उसे मौत का या यमराज का कोई खौफ नहीं रहता। वह तो हर रोज अनेकों बार शरीर छोड़ता है और फिर वापस जीवात्मा शरीर में लौट आती है। स्वामी जी महाराज के शब्दों में कि ‘‘जब यहां से जाना ही है तो तुम अपना बोरिया-बिस्तर बांधे रहो और जब वो आऐ और कहे कि मकान खाली करो तो इस शरीर से निकलकर चल दो और कहो कि यह तुम्हारा मकान खाली कर दिया है और साफ-सुथरा जैसा दिया था वैसा ही वापस कर दिया। कुछ समय पहले बाबा जी ने कहा था कि कुदरत बौखलाई हुई है, पाप बहुत बढ़ गया है और कुछ करना चाहती है। महात्मा बीच में खड़े हैं इसलिए कुछ कर नहीं पाती। महात्माओं से जब तक हरी झण्डी नहीं मिलती वो कुछ भी नहीं कर सकती। महात्मा समझा रहे हैं महात्मा जीवों को समझाने-बुझाने में लगे रहते हैं और चाहते हैं कि जीव अब भी सम्हल जाऐं, बुराइयों को छोड़ दें, जीव हिन्सा बन्द कर दें, शाकाहारी हो जाऐ। अगर लोग नहीं मानते हैं तो वही हाल होगा जैसा त्रेता और द्वापर में हुआ था। पहले महाभारत हुआ फिर 56 करोड़ यदुवंशी एक झटके में साफ हो गऐ। बाबा जी ने लगभग 30 वर्ष पहले बलरामपुर में कहा था कि बच्चों ! अभी तो तुम्हें समझाया जा रहा है। समझाने में तो माफी है लेकिन न्याय के तख्त पर बैठकर महात्मा क्या काम करेंगे यह तुम्हें वक्त बता देगा। इसी कलयुग में कुछ समय के लिय सतयुग आ रहा है। दोनों युगों की टक्कर जब होगी तो बीसों करोड़ लोगों का सफाया हो जाऐगा। थोड़े लोग ही बचेंगे जो धार्मिक होंगे। info.jaigurudevworld.org www.jaigurudevworld.org |