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जयगुरूदेव समाचार
Date : 07-Feb-2010
    मथुरा आश्रम पर प्रेतबाधा से पीड़ित लोग लगभग प्रतिदिन आ रहे हैं इस उम्मीद से कि बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की दया से आराम मिल जाऐगा। बाबा जी के आदेश से प्रेतात्माओं को शाम को अन्धेरे में भोजन दिया जाता है जिसे बाबा जी के दो-तीन प्रेमी यह काम करते हैं। सामान्यतः एक सप्ताह के बाद आराम मिलने पर लोग अपने घरों को लौट जाते हैं। बाबा जी के शब्दों में कुछ प्रेतात्माऐं जिद्दी होती हैं अतः उन्हें हटाने में थोड़ा समय लगता है।
    हत्याऐं बहुत होने लगी हैं। अकाल मृत्यु को प्राप्त जीवात्माऐं प्रेत योनि में चली जाती हैं और बची हुई स्वांसों को उन्हें उस योनि में बिताना पड़ता है। महात्माओं के आदेश को वो टाल नहीं सकती और महात्मा जोर जबर्दस्ती भी नहीं करते हैं। उन्हें भरपेट भोजन खिलाकर कुछ दिन में प्रसन्न कर देते हैं और वो चली जाती हैं।
    बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने वाराणसी से ही वर्ष 1952 में सत्संग का शुभारम्भ किया था। प्रारंभिक दिनों में लोगों ने काफी विरोघ किया था। बाबा जी ने कहा कि परमार्थ के रास्ते पर चलने के लिए शाकाहारी होना जरूरी है। जो शाकाहारी नहीं हैं उन्हंे मरने के बाद सीधे नर्क में जाना पड़ता है। कबीर साहब ने कहा है किः-
    मिलभर मच्छी खाय कर, कोटि गऊ दे दान।
    काशी करवट ले मरे, निश्चय नर्क निदान।।
    जीवन काल में यदि किसी ने एक दिन भी मांस का टुकड़ा खा लिया तो उसे नर्क में जाना पड़ेगा जहां जीवात्माओं को बड़ी यातनाऐं दी जाती हैं। एक दिन सत्संग में बाबा जी ने कहा कि गुरू नानक जी का एक शिष्य किसी गलती के कारण नर्क में चला गया। नर्क कई हैं और एक-एक नर्क लाखों-लाखों कोस में है। मामूली विस्तार नहीं है। नर्कों में इतना कष्ट जीवों को दिया जाता है कि लिखने में नहीं आ सकता। कहीं पीप और मवाद का समुद्र है तो कहीं खौलते हुऐ तेल में जीवात्माओं को डाला जाता है। संत समर्थ होते हैं। अपने जीव के लिए नानक जी नर्क में गऐ तो उनका शिष्य बोला कि गुरूजी !यहां बड़ी तकलीफ है, नर्क के सभी जीवों को लिकालकर ले चलिए। नानक जी ने प्रार्थना स्वीकार किया। वाणी में आता है किः-
    नानक जाय अंगूठा बोरा, सब जीवन का किया निवेड़ा।।
    गुरू नानक ने अपना अंगूठा जब नर्क में डाला तो सारा नर्क सूख गया और सभी जीवों को मनुष्य शरीर मिल गया।
    यह काम काल भगवान नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि अच्छा करो या बुरा करो मैं कुछ नहीं करूंगा लेकिन उसका फल मैं दूंगा। भगवान राम ने कहा है किः-
काल रूप में तिन्हकर भ्राता, शुभ और अशुभ कर्म फल दाता।।
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