|
| Date : 17-Feb-2010 |  |
|
बाबा जयगुरूदेव जी महाराज अपनी जन्मस्थली खितौरा (जिला इटावा) से कल रात्रि 9 बजे अपने काफिल के साथ चलकर आज प्रातः लगभग 4 बजे मथुरा आश्रम पर पहुंच गए। सूचना मिलने पर सड़क के किनारे जगह-जगह प्रेमी दर्शन के लिए खड़े थे अतः यात्रा लम्बी रही और समय लगा। अपने संक्षिप्त संदेश मंे गुरू महाराज ने कहा कि इस मृत्युलोक में जब तक महापुरूषों की तलाश नहीं होगी तब तक उस मालिक का भेद और पता नहीं मिल सकता। इसलिए भेदी मिलना चाहिऐ। अवतारी शक्तियां जो समय-समय पर यहां आईं उनको भी ऊपर का कोई पता नहीं है। अपने-अपने कर्मों का फल सबने पाया। यह बात सत्य है कि अनामी पुरूष ने अलख, अगम और सतपुरूष को स्थापित किया। सतलोक, अलखलाक, अगमलोक सब एक से एक बड़े देश हैं। ये तीनों स्थिर हैं। इनमें कोई मिलौनी नहीं। ये तीनों देश चलायमान नहीं हैं। सतलोक से नीचे सारी रचनाऐं अस्थिर हैं। सबका समय निश्चित है। समय पूरा होने पर सब खत्म हो जाऐंगी। जितनी भी अवतारी शक्तियां आईं वो नीचे से आईं। उन्होंने कहीं भी ऊपर के संकेत नहीं दिऐ। ब्रह्मा ने समाधी लगाई और समाधी में उनको आदेश हुआ कि जो कहूं वो लिखो। आवाज सुनकर ब्रह्मा ने लिखा। उन्होंने केवल सुना, देखा नहीं और यह लिखकर छोड़ दिया कि आगे भी कुछ है।
निरंजन भगवान ने फंसाया
सत्संग में बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ेने कहा कि जीवात्माऐं सतलोक से भण्डार के रूप में नीचे उतारी गईं और शरीरों में बंद कर दी गईं। उस समय कर्मों को कोई नियम नहीं बना था, कोई पाप-पुण्य नहीं लगता था। सारी जीवात्माऐं उदासीन और दुनियां के प्रति अभाव भावना में रहती थीं और हम अपने घर सतलोक लौट जाऐं। बंधन केवल इतना ही था कि इतने दिनों तक दुनियां में रहना है। सब ज्ञानी थे और समय पूरा करके अपने लोक में सतलोक चले जाते थे। निरंजन भगवान ने इस पर विचार किया। फिर अपनी शक्तियों को यहां उतारा, उनसे तपस्या कराई, उनको ऋद्धि-सिद्धि दी और कर्मों का पूरा विधान बनाया। सब आत्माओं को कार्य करने की स्वतंत्रता दे दी लेकिन फल भोगने में सबको परतंत्र कर दिया। इसका विधि-विधान से प्रचार करवाया और फिर धीरे-धीरे मैल अन्तःकरण पर जमने लगी। कितने युग और कल्प बीत गऐ और कर्मों का पहाड़ सबने जमा कर लिया। कलयुग में सात सौ वर्षों में संतों ने कृपा की और जीवात्माओं को जगाने और कर्मों के बंधन से छुड़ाने का रास्ता खोला। इसके पहले जो भी किताबें हैं उनमें कोई भी आत्माओं को छुड़ाने का रास्ता नहीं लिखा है। समय अच्छा नहीं है। शाकाहारी हो जाओ। मौत के बाद तुमसे एक-एक कर्म का हिसाब मांगा जाऐगा। वहां बड़ी मार पड़ती है। तुम सोचो कि तुम्हें बचाऐगा कौन ? info@jaigurudevworld.org www.jaigurudevworld.org |
|