| Date : 07-Mar-2010 |  |
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कुछ विदेश के लोग मथुरा में
जयगुरूदेव मन्दिर को दखने आऐ और बाबा जयगुरूदेव जी महाराज से मिलने की
इच्छा लिए बाबा जी की कुटी में गऐ। सफेद वस्त्र में बाबा जी के भव्य रूप को
वे देखते ही रह गऐ। पूछने पर उन्होंने बताया कि इस स्थान पर चुम्बक जैसा
खिंचाव हो रहा है। बाबा जी ने हाथ जोड़कर सबका अभिवादन किया। यह भी कहा कि
मालिक का दर्शन दीदार करने की अगर इच्छा है तो शाकाहारी होना जरूरी है। दिल
में दया भाव रहेगा तभी वह परमात्मा रहम करेगा।
महाराष्ट्र से आऐ तीर्थ
यात्रियों को सम्बोधित करते हुऐ बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने कहा कि भारत
संतों-महात्माओं का देश है। यहां जब भी गड़बड़ी होती है लोग मानवधर्म-कर्म,
नैतिकता त्याग देते हैं तब कोई न कोई ऐसी शक्ति, ऐसा महापुरूष पैदा होता है
तो धर्म की स्थापना फिर से करता है। अधर्म का विनाश हो जाता है। सतयुग,
त्रेता, द्वापर सभी युगों का इतिहास है। अभी कुछ ही दिनों में आप प्रतीक्षा
करेंगे कि कोई आकर न्याय, नैतिकता, प्याय-मुहब्बत का संदेश सुनाऐ। इतिहास
बताता है कि ऐसी शक्तियां समय-समय पर आईं और उन्होंने लोगों को समझाया। जो
मान गएग उनकी रक्षा हुई। याद रखिऐ कि बिना धर्म के सेवा, सदाचार, न्याय,
शान्ति, चरित्र नहीं आऐगा और न ही सन्तोष होगा। कहा है किः-
जब आवे सन्तोष धन, सब धन धूर समान।
इतिहास बताता है कि बड़े-बड़े
राजे-महाराजे महात्माओं के पास गऐ, उनके संदेशों को सुना और समझा। जब
सन्तोष आ गया तो राज्य त्याग दिया। किसी-किसी ने राज्य पर ठोकर मारकर जंगल
की राह पकड़ ली और प्रभु प्राप्ति की साधना में लग गऐ। महात्माओं की सन्तोष
धन की शिक्षाऐं परम्परा से चली आ रही हैं पर आज ऐसा समय आ गया है कि जिस
मानवता की विद्याऐं प्राप्त करने पर मनूष्य मनुष्य कहलाता था उसको सबने
त्याग दिया। अब भोग विद्या में सब लग गऐ जिससे मन, बुद्धि, चित्त मलीन हो
गऐ और आत्मा गंदी हो गई। उसकी सफाई के लिए बाहर की अग्नि, वायु, पानी,
साबुन नहीं है। उसकी सफाई के लिए आध्यात्मिक विद्या चाहिऐ और बिना इसके अब
किसी को भी शान्ति नहीं मिलेगी।
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