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जयगुरूदेव समाचार
Date : 08-Mar-2010
जयगुरूदेव समाचार
मथुरा 8 मार्च 10
    लखनऊ के जयगुरूदेव आश्रम पर कुछ दूरदर्शन चैनलों के पत्रकार एवं पदाधिकारी पहुंचे ओर कहा कि वे अपने-अपने चैनलोें पर बाबा जयगुरूदेव जी महाराज के कार्यक्रम को दिखाना चाहते हैं। आश्रम के प्रबन्धक ने जवाब दिया कि ‘खुशी की बात है।’ बाबा जी के आध्यात्मिक संदेशों का काम आरम्भ कर मीडिया के लोग जनता तक पहुंचाने का काम आरम्भ कर दें तो देश के परिवर्तन में कोई देर नहीं लगेगी। बाबा जी ने 1972 के अंत तक देश में बीस करोड़ लोगों का जन-जागरण कर दिया था। ऐसा कोई भी प्रान्त नहीं बचा जहां बाबा जी के अनुयायी न हों। इसका नमूना मथुरा में होने वाले वार्षिक कार्यक्रम में देखने को मिलता है।
    अब लोगों में धर्म के अंकुर दिखाई देने लगे हैं। जब लोग चोरी, बेईमानी, कतल, अनाचार, व्यभिचार आदि से थक जाऐंगे तब बदलाव आऐगा। बाबा जी ने अपने संदेश में कहा कि यह मृत्युलोक मण्डल परदेश है। यहां सेवा प्रेम, मुहब्बत सदाचार, सत्य और ईमानदारी से रहोगे तो अमन-चैन से रह सकोगे। अगर ये चीजें नहीं रहेंगी तो चैन से नहीं रह सकोगे। यह जो चोरी, डकैती, मारना-पीटना, धोखाधड़ी, आगजनी कर रहे हो, तोड़फोड़-आन्दोलन कर रहे हो इससे अमन-चैन हरगिज नहीं आ सकता।
    समय किसी का इन्तजार नहीं करता। जो समय से काम ले लेते हैं वहीं बुद्धिमान होते हैं। जो समय चूक जाते हैं उनको बाद में पछताना पड़ता है। प्रेमियों से बाबा जी ने कहा कि दुनियां अब और बिगड़ने जा रही है। भारी परिवर्तन होगा। छोटा-मोटा विनाश नहीं होगा। जिनको प्रभु प्राप्ति का मार्ग मिला है उन्हें मेहनत और लगन के साथ भजन ध्यान में लग जाना चाहिऐ। भजन करोगे तो समय जो खराब आ रहा है वह पार हो जाऐगा और तकलीफें बगल से निकल जाऐंगी। आंच तो आऐगी जरूर किन्तु जलने से बच जाओगे। अच्छे कर्म करोगे तो महात्माओं की दया हो जाऐगी और बचाव हो जाऐगा।
    बाबा जी ने फिर कहा कि इस बात को याद करते रहें कि जब कभी सृष्टि में अधर्म फैल जाता है, सृष्टि के लोग चरित्रहीन हो जाते हैं और बुद्धि का विवेक समाप्त हो जाता है तब कोई न कोई महान आत्मा का आना इस संसार में होता है और फिर एक आवाज देश में लगती है। भारत धर्म प्रधान देश है। यहां की विभूतियां विश्व को नचाया करती थीं और अब वही समय आगे आ रहा है। आवाज लग चुकी है इसमें दो राय नहीं है। हारकर, मजबूर होकर तुम्हें महात्माओं के पास जाना होगा तभी कुछ होगा। जो भौतिक विकास द्वापर में था वह आज कलयुग में अभी नहीं हुआ है। भारत की आध्यात्मिक शक्ति के आगे कोई भी देश टिक नहीं सकता। तुम करके देख लो। अगर विश्व के सारे राष्ट्र एक साथ मिलकर अपने आणविक हथियारों के साथ भारत पर आक्रमण करें फिर भी वो जीत नहीं पायेंगे। मानव शरीर अनमोल है। स्वासों की पूंजी गिनकर तुम्हें मिली है। जहां आखिरी स्वांस खत्म हुई कि यह शरीर धड़ाम से पृथ्वी पर गिर जाऐगा। तुम्हें रास्ता मिला है तो भजन करो और जीते जी शरीर से अलग होकर मीराबाई की तरह ऊपर के दैविक मण्डलों में चढ़ चलो। उधर खुले हुऐ सुन्दर-सुन्दर देश हैं, स्वर्ग है, बैकुण्ठ है, देवी-देवता मिलते हैं। वहां तकलीफ नहीं, आनन्द ही आनन्द है। इसी कलयुग में कबीर साहब, नानक जी, गोस्वामी तुलसीदास जी, रैदास जी आदि महात्माओं ने तमाम जीवों को उन आध्यात्मिक मण्डलों में पहुंचा दिया। तुम भी जा सकते हो बशर्ते ऐसे पूरे अनुभवी गुरू मिलें तब। इसी कलयुग में मीराबाई ने अपने सुरत को बताते हुऐ कहा किः-
मीरा मानी सुरत सैल असमानी।
जब जब सुरते परे वा घर की ,
पल पल नैनन पानी।
रात दिवस मोंहि नींद न आवै,
भावे अन्न न पानी।
ऐसी पीर उठी तन भीतर,
कसक कसक कसकानी।
रैदास संत मिले मोहिं सतगुरू
दीन्हा सहज सुखदानी।
मैं मिलि जाय, पाय पिय अपना,
तब मोरी पीर बुझानी।
खाक सलक सिर  डारी,
निज घर अपना जानी।
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