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जयगुरूदेव समाचार
Date : 12-Mar-2010
    कल प्रातः मथुरा से चलकर बाबा जयगुरूदेव जी महाराज जगह-जगह लाखों नर-नारियों, बच्चों को दर्शन देते हुऐ शाम को 7 बजे खितौरा पहुंचे। मन्दिर निर्माण, खेती, आदि अनेक विषयों की जानकारी बाबा जी ने सेवादारों से ली। खितौरा तीर्थ बनने जा रहा है। जहां बाबा जयगुरूदेव जी महाराज के शब्दो मेंः-‘मैं एक करोड़ लोगों को यहां बैठाकर भजन कराऊँगा। परमात्मा मरने के बाद नहीं अपितु मरने के पहले मिलता है। रास्ता बताने वाला सच्चा और पूरा होना चाहिऐ।’ बाबा जी के आगे के कार्यक्रम की अभी कोई सूचना नहीं है।
    बाबा जी ने अपने संदेश में कहा कि यह संसार एक धोखा है, कष्टों का सागर है। सबको अपने-अपने कर्मों के अनुसार दुख-सुख भोगने पड़ेंगे। यदि बुरे कर्म करोगे, पाप कर्म करोगे तो उसकी सजा तुमको भोगनी पड़ेगी। जो साधक हैं, साधना करते हैं भजन करते हैं उन्हें इन सब बातों की जानकारी रहती हैध्। मरने के पहले साधन भजन द्वारा जीवात्मा शरीर से अलग होकर ऊपर के दैविक मण्डलों की जब सैर करती है तब उसे ईश्वरीय विधान का, इस रहस्य का पता चलता है।
यह रहस्य रघुनाथ कर, वेगि न जाने कोय।
जो जाने सो गुरू कृपा, सपनेहुं मोह न होय।।
    महात्माओं की मेहनत कभी निरर्थक नहीं हाती है। देश में महात्माओं की कमी हो गई इसीलिए किसी को सही रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है और हताश हो रहे हैं। दिशा शून्य हो गऐ हैं, दिशाहीन हो गऐ हैं। महात्माओं से जब से लोगों ने उनकी शिक्षाओं को लेना छोड़ दिया तब से सब दुखी हो गऐ। मनुष्य को प्रयत्नशील होना चाहिऐ। भाव से, वाणी से कर्म करते रहना चाहिए। इस तरह भटकते हुऐ भी मनुष्य अपनी जगह पर पहुंच जाऐगा। आगे प्रेम की बरसात होगी और उसी वर्षा की तैयारी हो रही है। लोगों को उस समय परिचय मिलेगा जब बुद्धि स्थिर हो जाऐगी, दया आऐगी, सेवा आऐगी, आदर-सत्कार आऐगा और लोग अपने-अपने गुनाहों की बार-बार माफी मांगेंगे। उस मालिक की, प्रभु की दया जो हो रही है उसका संकेत महात्माओं ने समय-समय पर दिया है। हमारे गुरू महाराज ने कह दिया था कि सबको फायदा पहुचाया जाऐगा, कोई जो पास आऐगा वह खाली हाथ वापस नहीं जाऐगा। पर आप बर्तन को तो खाली करो। जान बूझकर लोट उल्टा कर दो, जो चीज दी जाऐ उसे गिरा दो तो वह नीचे चली जाएगी। इसलिए लोटे का स्थान ठीक कर लो। महात्मा आपके हृदय रूपी कटोरे में कुछ रखना चाहते हैं। आध्यात्मवाद की एक बूंद कितनी विशाल होती है, कितनी उसमें शक्ति होती है इसे तुम नहीं समझोगे। इसलिए जो दिया जाऐ उसे ले लो। अभाव में उसे फैंकना मत और भाव में जितना रख सकते हो उतना रख लो। वह जाल है, शिकंजा है महात्माओं का। जब उस घेरे में आपको ले लेते हैं तब वे अपना काम करते हैं।
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