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जयगुरूदेव समाचार
Date : 27-Jul-2010

गुरूपूर्णिमा विशेष
    आज गुरूपूर्णिमा पावन पर्व का सातवां व अंतिम दिन है। प्रातः काल 6 बजे परमपूज्य स्वामीजी महाराज ने नामयोग साधना मन्दिर के प्रांगण में बने सत्संग मंच से अपने शुद्ध आध्यात्मिक संदेश में कहा कि यह मानव तन तुमने पाकर इससे यदि अपनी जीवात्मा को जगाने का काम नहीं किया तो यह जा रहा है और फिर आपको नहीं मिलेगा। आपने इस अनमोल तन से संसार के कामों को किया और बराबर कर रहे हो। आपको सोचना चाहिऐ कि जितना आपने संसार को एकत्र किया है क्या वह आपके पास है? क्या आपको उससे सुख प्राप्त हो रहा है? आपने तो इसे ही अपना मान लिया। आपको सोचना चाहिऐ कि जब आप आऐ थे तो क्या साथ लाऐ थे। यहां जो भी सामान आप देख रहे हो वह सब उस ईश्वर ने पहले से ही आपके प्रयोग के लिए यहां भेज दिऐ हैं। यह इसलिए दिऐ गऐ कि आप जब संसार में आऐं तो इन सामानों से अपना काम ले लो और फिर इन्हें यहीं छोड़ दो। पर आपने सोचा कि यह हमारा है वह हमारा है। फंस गऐ इसमें और अब दुखों की पोटली बंध गई तो रोते हो। कभी आपने सोचा है कि कौन इन मुसीबतों से आपको बचाऐगा ? कौन दुखों के सागर से निकालेगा ? बस अंधे की तरह संसार में दौड़ रहे हो। याद रखो कि यह कर्मों का देश है और यहां आपको यह मानव तन इस लिए दिया गया है कि अबकी बार आप इस मानव तन में रहकर जल्दी से अपनी जीवात्मा को जगा लो और यहां से निकल चलो। यहां का कोई सामान आपका नहीं है इससे बस अपना काम ले लो और इससे अपने आप को बांधो नहीं। यहां से निकलने के लिए आऐ हो और जल्दी करो भजन कर लो और आगे यह समय भी नहीं मिलेगा।
    गुरू महाराज ने आगे कहा कि जिन जिलों और प्रान्तों में आप कार्यक्रम चाहते हैं उन जिलों के जिम्मेदार अपनी लिस्ट बना कर श्री उमाकान्त तिवारी जी को या स्वामी जी महाराज को दे दें।
    कार्यक्रम शान्ति से सम्पन्न हुआ इसके लिए स्वामी जी महाराज ने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं स्थानीय निवासियों का धन्यावाद किया।
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