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जयगुरूदेव समाचार
Date : 28-Jul-2010
    आज परमपूज्य स्वामी जी महाराज ने प्रातः सत्संग दिया। अपने संदेश में गुरू महाराज ने सभी को शाकाहारी होने और बराबर भजन करने का आदेश दिया। सुरत यहां काल के जाल में फंसी है, कर्मों का बोझ रोज आपकी जीवात्मा पर बढ़ता जा रहा है फिर भी मानव को होश नहीं है कि यहां से निकलना है और फिर यह मौका नहीं मिलेगा।
    सेवादार बराबर यहां बने हुऐ हैं सेवाओं का काम जारी है। मेला क्षेत्र से सभी विभाग अपना-अपना सामान समेट रहे हैं। सेवादारों का यहां पर इस समय बहुत ही जरूरी काम है। पूरे मेला क्षेत्र में सफाई का काम होना है। जिस प्रकार आरम्भ में आपको यह मैदान मिला था उसी प्रकार इसे साफ करके छोड़ना है। यह एक ऐसा आचरण है जिससे समाज में और भी जीवों को शिक्षा मिले और सभी अपने आस-पास साफ-सफाई रखें।
बीते हुऐ दिन (सूरत में 18 अप्रैल 1974)
    सूरत में 18 अप्रैल 1974 को बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने बताया कि देश में धर्म का जन-जागरण हो रहा है। इस मानव प्रेम इन्सानियत मुहब्बत के जन-जागरण में सभी एक सूत्र में बंधते चले जा रहे हैं। नर-नारी बच्चे प्यार से प्यासे हैं और जब इन्हें पानी मिलता है तो वे दौड़ पड़ते हैं। आश्चर्य है कि हिन्दुस्तान का कोई रेडियो अखबार नहीं बोलता है।
    आदमी एक काम करना जानता है कमाने का। माताओं पर आधिक भार है। निवेदन है कि जिम्मेदारी अधिक है। निवेदन है कि एकमात्र तुम यदि चैन अमन पाना चाहते हो तो खुदा पर, भगवान पर विश्वास करो पूजा करो और नेक काम करो। तुम्हें ताकत मिलेगी और सुख शांति की लहर आऐगी। महात्माओं की तालीम को हमने छोड़ दिया। केवल भोजन-कपड़ा मिल जाना चाहिऐ यह तो पशु-पक्षी भी करते हैं फिर आपकी इल्मीयत और ज्ञान क्या रहा ? देश के अन्दर विप्लव आ जाऐगा। धर्म से भी गऐ। अब न तो शारीरिक धर्म रहा और न तो आध्यात्मिक धर्म रह जाऐगा। अब वह दिन दूर नहीं है जब इन सबका परिणाम आपके सामने आऐगा। हर लोग किसी न किसी पर विश्वास रखते हैं चाहे कहीं रखें। हर कोई मजहब के साथ, धर्म के साथ बंधा हुआ जरूर है। बाबा जी की पुकार आत्मा के कल्याण के लिए है। समय नाजुक है जिन्दगी थोड़ी है अपने लिए कब काम करोगे? आध्यात्मिक जिन्दगी बना लो वह एक स्वतन्त्र जिन्दगी है, प्रेम जिन्दगी है उसमें दुख नहीं, मरना नहीं। गृहस्थ जीवन में सभी काम-काज करते हुऐ उस जिन्दगी को जगा लेते हैं। उन विभूतियों को, शक्तियों को प्राप्त क्यों नहीं करते जिससे यह काल कलेश का, जन्म-मरण का दुख समाप्त हो जाऐ ?
    मैंने हिन्दुस्तान में 20 करोड़ से ऊपर आदमियों को तैयार कर दिया है। अनमोल वस्तु किसानों एवं उनके बच्चों को पकड़ा रहा हूं। अब वे समझने लगे कि क्या करना चाहिऐ। मैं आध्यात्मिक हूं। प्रचार आध्यात्मिक करता हूं। हिन्दू हूं मुसलमानों से मुहब्बत करता हूं। तुमने अपनी-अपनी जुबान में उस परमात्मा का नाम रखा। तुम्हारी आंख नहीं खुली इसलिए ऐसा किया। वह यही कहेगा कि मैं तो पैगम्बर, फकीरों, महात्माओं को भेजता रहा तुम उनसे रास्ता पूछते। वहां आनन्द के सुन्दर-सुन्दर लोक हैं।
    मैं मानव सेवा, आत्मा की सेवा करता रहा। यह किस तरह से होगा यह मैं अच्छी तरह जानता हूं। मैं धर्म का संदेश देता रहा किन्तु आपने मुझे जबर्दस्ती ढकेला कि बाबा जी राजनीति में आ गऐ। लाखों का दिव्य नेत्र खोल दिया। एक-एक स्थान पर कई-कई लाख की भीड़ होती है। अगर यह काम न होता तो इतनी भीड़ इस नीरस और सूखे संदेशों को सुनने के लिए न आती। तुमने आत्मा को सुला दिया, बुद्धि को सुला दिया, भौतिक बुद्धि जागे बिना आत्मा कैसे जागेगी ? तुमको आदेश है कि फकीरों, महात्माओं से मिलो योग और ध्यान अवस्था में बैठना। अन्दर में एक दरगाह, सैरगाह है यहीं ज्ञान चक्षु खुल जाऐगा तब लगेगा कि यह दुनियां क्षण भंगुर, नाशवान, भूल और भरम की है। जब तुम्हें आनन्द महसूस होने लगेगा तब तुम्हें कोई बहका नहीं सकेगा। मजहब के झगड़ों को मिटाकर प्रेम का पाठ पढ़ा कर सबको एक रास्ते पर चला रहा हूं। एक स्वार्थी को सौ बेवकूफों की अक्ल होती है और वह सबको धोखा देता है। ‘‘स्वारथ रत परिवार विरोधी।’’ वह अपने स्वार्थ के लिए दीवाना और पागल रहता है। स्वार्थ में आकर तुम हमको क्या समझ सकते हो। कुछ दिन बाद लोग समझने लगेंगे। धीरज का फल मीठा होता है। धैर्य रखकर महात्माओं की बात मान लो। अब लोग मानने लगे और सुनने लगे। भारतवर्ष सबसे उच्च देश है, धर्म प्राण भूमि है। महात्माओं के कदमों में पवित्रता है, निर्मलता है। आप सब मिटाना चाहते थे पर यह मिट नहीं सकता। जब आपको इच्छा हो रास्ता पूछ लीजिऐगा। जयगुरूदेव नाम के बाबा आपको रास्ता बता देंगे। राम नाम की मणि तुम्हारे अन्दर जल रही है, वह प्रकट हो जाऐगी और तुम्हारी आंख खुल जाऐगी। शारीरिक आराम चाहिऐ तब भी चले आना वह भी बाबा जी ठीक कर देंगे। भारतीय जनता पर मुझे पूरा विश्वास है। मैं विश्वास लेकर चला हूूं जनता का विश्वास महात्माओं के ऊपर और महात्मा का विश्वास उन पर है। समय आने पर यह भूमि अपना जलवा दिखाऐगी। ध्यान-भजन की प्रतिक्रिया में नर-नारी लगे रहेंगे। बाबा जी की मेहनत की इज्जत रखना। जब यहां से तुम जाने लगो तो आध्यात्मिक धन खड़ा हो जाये, जन्म-मरण न होने दे, पशु-पक्षियों की योनियों में न जाने दें। मौत के वक्त में अन्त में जयगुरूदेव नाम भगवान का उच्चारण करना। जब उसे होश आ जाऐ तो उससे पूछना कि कौन खड़ा है। मैं इधर भी साथ देता हूं और उधर भी साथ देता हूं।
    राजनीतिज्ञोंने कहा कि ये कैन्डीडेट खड़ा कर रहे हैं। न मुझे राष्ट्रपति बनना न प्रधानमंत्री बनना, न एम.एल.ए. और एम.पी. बनना है।
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