| डायरी का प्रथम प्रष्ठ
मथुरा 16 दिसम्बर। डायरी के संबन्ध में जयगुरूदेव बाबा ने यहाँ बताया कि 1 जनवरी 1973 का दिन याद करने लायक होगा। सत्संगी अपनी अपनी डायरी के प्रथम प्रष्ठ पर 15 दिसम्बर 1972 तथा 1 जनवरी 1973 की महत्वपूर्ण तिथियों को अवश्य नोट करेंगे।
बाबा जी ने आगे कहा कि दफतर में, कचहरियों में या अन्य जगहों में रिश्वत, अन्याय, माँस, मछली, अण्डा, शराब खान पीने की बातों को लिखना शुरू कर दें। हिन्दुस्तान में कोई ऐसा दफतर नहीं जहाँ हमारे सत्संगी न हों। किसान अगर घूस देते हैं तो उन्हें पाप नहीं लगेगा किन्तु घूस लेने वालों को पाप लगेगा। तुम भी कुछ बोलना नहीं और चुपचाप अपनी डायरी में नोट कर लेना। जिस अधिकारी को तुमने पैसा दिया होगा उसे अपनी जायदाद से वापस करना होगा।
बाबा जी ने पुनः बताया कि सभी लोग गुप्तचर बन कर काम करें। अभी तो दफतर नहीं बनाया है और इस डायरी को ही दफतर बनाया है। सबका लेखा जोखा होगा चाहे प्रधानमंत्री हो, राष्ट्रपति हो, मुख्यमंत्री हो या अन्य कोई मऩ्ी अधिकारी हो अगर कोई रिश्वत लेता है तो लोगों को डायरी में नोट करा देना चाहिऐ। शराब पीने वाले, मांस मछली अण्डा खाने वाले, आन्दोलन, हड़ताल, तोड़फोड़ करने कराने वालों के नाम अवश्य नोट करा दें। हर दफतर में हमारे आदमी हैं और 20 करोड़ का जन जागरण हो चुका है।
-(शाकाहारी पत्रिका: 21 दिसम्बर 1972) |