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त्रिजटा का स्वप्न
त्रिजटा का स्वप्न पटेल नगर में लोगांे के पूछने पर बाबा जयगुरूदेव ने बताया कि मेरा स्वप्न कभी गलत नहीं हो सकता है। रावण जब सीता को लंका ले गया तो उसने बहुत डराया धमकाया कि राम को भूल जाओ और मेरी बात मान लो। त्रिजटा राक्षसी को समझाने बुझाने के लिए सीता के पास छोड़ दिया। त्रिजटा ने रात्रि में स्वप्न देखा कि एक बन्दर आया है और उसने बाग बगीचों को तहस नहस कर दिया है और सोने की लंका को जला दिया है और राम ने रावण का वध कर दिया है। दूसरे दिन प्रातः काल त्रिजटा ने वाटिका की सभी राक्षसियों को बुला कर अपने स्वप्न को सुनाते हुऐ कहा कि तुम लोग सीता का साथ दो इसी में तुम्हारी भलाई है। जयगुरूदेव बाबा ने हंसते हुऐ कहा कि जब त्रिजटा का स्वप्न सच्चा हो सकता है तो मैं तो राक्षस नहीं हूँं। मेरा स्वप्न कभी गलत नहीं होगा और भविष्य में दिल्ली से राजधानी हटा दी जाऐगी, परिवार नियोजन गर्भपात बन्द कर दिया जाऐगा, पुलिस के सिपाहियों, प्राईमरी सकूल के अध्यापक को 300 रू0 वेतन अवश्य मिलेगा, भारत के सभी बूचड़खाने बन्द कर दिऐ जाऐंगे, मांस, मछली, अण्डा, शराब बेचने वालों को 10 साल की सजा मिलेगी और 5 बैंत रोज सुबह शाम लगा करेंगी। भारत का संविधान बदल जाऐगा, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, एम0 एल0 ए0, एम0 पी0 अधिकारी कोई भी पैसा रिश्वत नहीं लेने पाऐगा। मांसाहारियों, शराबियों, बवाबियों को भारत की जनता अपना मतदान नहीं देगी। -(शाकाहारी पत्रिकाः 14 नवम्बर 1972)
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