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जयगुरूदेव सत्संग
Date : 18-Oct-2009

सत्संग वचन


 कार्यक्रम में दस मिनट पहले पहुंचो। तुम सोचो कि ट्रेन हमारे जाने पर छूटेगी तो यह तुम्हारा धोखा है। यह रास्ता है मालिक से मिलने का। जो नामदान दिया जाता है कमाई करने का। तुम काम करते हो बच्चों का, दूसरों का, अपना काम नहीं करते। जीवात्मा निकल जाऐगी तो ये कुछ साथ नहीं देगा। सामान आपका नहीं। सामान तो इसलिए दिया गया कि इससे काम ले लो और जीवात्मा को निकालो। अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब होता है। यह देश काल का है, दयाल का देश नहीं है। दयाल के देश में चलते नहीं हो बस यही कहते हो कि बीमारी ठीक कर दीजिऐ, नौकरी दे दीजिऐ, बच्चा दे दीजिऐ, रोजी-रोटी दे दीजिऐ। जो भी यहां आते हैं किसी ने यह नहीं कहा कि ऊंची बात सुना दीजिऐ, मैं संसार नहीं चाहता हूं।
 इसलिए महात्माओं ने कहा कि करोड़ों में कोई-कोई चलेगा और कोई-कोई पहुंचेगा। अगर तुममें तड़प होती तो ईश्वर को प्राप्त करते, ब्रह्म को प्राप्त करते। न ईश्वर के लिए तड़प, न ब्रह्म के लिए तड़प। यहां आऐ हुऐ हो हुड़दंग मचाने के लिए। जब कहा जाता है कि सब लोग बैठे हुऐ मिलेंगे तो भागदौड़ करते हो। क्या मिलेगा भागदौड़ से ? दीवाली में आऐ हो, अन्तर में चलो। वहां कितने दिये जल रहे हैं। जब काया तुम्हारी नहीं है तो तुम जीवात्मा के लिए कुछ कहते, मालिक की तरफ चलते। करोगे तभी कुछ मिलेगा, नहीं करोगे तो कुछ भी नही मिलेगा। यह करनी का मार्ग है।


 करनी करो मार मन डालो।
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