﻿<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?><rss version="2.0"><channel><title>जयगुरूदेव समाचार</title><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/RSS.aspx</link><description>This will not shown in the page.</description><copyright>© 2010 Jaigurudev Ashram. All Rights Reserved.</copyright><ttl>180</ttl><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; देश की लोकसभा और राज्यसभी में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर काफी हंगामा हुआ और पास न हो सका। मंहगाई का मुद्दा उसके आगे ठंडा पड़ गया। समाचारों को सुनने के बाद बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने कहा किः-&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;बहुमत तियमत बालमत, बिन नरेश को राज।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;सुख सम्पदा की कौन कहे, प्राण बचे बड़ भाग।।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जी ने प्रेमियों से कहा कि ये वक्त भजन कराने का ज्यादा है क्योंकि आगे विपदा आने वाली है। भजन करोगे तो वो पास से निकल जाऐगी, सीधी तुम पर नहीं गिरेगी। भजन अगर तुम नहीं करोगे तो सीधी आकर तुम पर गिरेगी। इसीलिए अपना ध्यान बनाये रहो तो सिमटाव होता रहेगा। जब-जब समय मिले भजन-ध्यान में बैठ जाओ।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;ध्यान में दोनों आंखों के पीछे तीसरा तिल है उस पर एकाग्रता होनी चाहिऐ। अगर गुरू का स्वरूप अन्तर में बिना किसी कोशिश के ठहर जाता है तो अच्छी बात है और स्वरूप तीसरे तिल पर नहीं ठहरता है तो ध्यान कच्चा है। उस समय स्वरूप का ध्यान करने के बजाय तीसरे तिल में अंधेरे को देखना चाहिऐ और बिना आसन बदले नाम का जाप करना चाहिऐ। यह मन को तीसरे तिल पर जमाये रखेगा और डेढ़ घण्टे या उससे भी पहले जब मन एकाग्र होगा तो सुरत यानी जीवात्मा शरीर को खाली करना आरम्भ कर देगी। जब शरीर कन्धों तक खाली हो जाऐगा तो अंधेरे में ज्योति आऐगी। जब अंधेरे की जगह रोशनी दिखाई देने लगे तो आसन बदले बिना सुमिरन जारी रखना चाहिऐ। वक्त आने पर गुरू का प्रकाशमय स्वरूप भी सामने आ जाऐगा। स्वरूप वही होगा जो गुरू का यहां भौतिक रूप है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;ध्यान एकाग्रता का फल है औऱ एकाग्रता सुरत को तीसरे तिल पर कायम रखकर जाप करने का फल है। इसलिए पहले सुमिरन से एकाग्रता प्राप्त करनी चाहिऐ। जब एकाग्रता स्थिर हो जाती है तो स्वरूप अपने आप ही आ जाता है। जब सुरत की धारायें आंखों के ऊपर जमा होनी शुरू हो जाती हैं तो कुछ न कुछ ज्योति चाहे कितनी धीनी हो जरूर दिखाई देंगी और पांव तथा पिण्डलियां जरूर सुन्न हो जाऐंगी। जैसे मौत के वक्त जीवात्मा शरीर से अलग हो जाती है उसी प्रकार संतमत की साधना से जीवात्मा शरीर से निकल जाती है फिर ऊपर के रूहानी मण्डलों की सफर करती है, उड़ती है फिर वापस शरीर में आ जाती है। इसी को जीते जी ही मरना कहते हैं। महात्माओं ने कहा है किः-&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जा मरने से जग डरे, मेरे मन आनन्द।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;मरने ही ते पाइये, पूरन परमानन्द।।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;br&gt;www.jaigurudevworld.org
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=556</link><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 03:20:28 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;div style="text-align: center; color: rgb(255, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जयगुरूदेव समाचार&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170); font-weight: bold;"&gt;मथुरा 8 मार्च 10&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;लखनऊ के जयगुरूदेव आश्रम पर कुछ दूरदर्शन चैनलों के पत्रकार एवं पदाधिकारी पहुंचे ओर कहा कि वे अपने-अपने चैनलोें पर बाबा जयगुरूदेव जी महाराज के कार्यक्रम को दिखाना चाहते हैं। आश्रम के प्रबन्धक ने जवाब दिया कि ‘खुशी की बात है।’ बाबा जी के आध्यात्मिक संदेशों का काम आरम्भ कर मीडिया के लोग जनता तक पहुंचाने का काम आरम्भ कर दें तो देश के परिवर्तन में कोई देर नहीं लगेगी। बाबा जी ने 1972 के अंत तक देश में बीस करोड़ लोगों का जन-जागरण कर दिया था। ऐसा कोई भी प्रान्त नहीं बचा जहां बाबा जी के अनुयायी न हों। इसका नमूना मथुरा में होने वाले वार्षिक कार्यक्रम में देखने को मिलता है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;अब लोगों में धर्म के अंकुर दिखाई देने लगे हैं। जब लोग चोरी, बेईमानी, कतल, अनाचार, व्यभिचार आदि से थक जाऐंगे तब बदलाव आऐगा। बाबा जी ने अपने संदेश में कहा कि यह मृत्युलोक मण्डल परदेश है। यहां सेवा प्रेम, मुहब्बत सदाचार, सत्य और ईमानदारी से रहोगे तो अमन-चैन से रह सकोगे। अगर ये चीजें नहीं रहेंगी तो चैन से नहीं रह सकोगे। यह जो चोरी, डकैती, मारना-पीटना, धोखाधड़ी, आगजनी कर रहे हो, तोड़फोड़-आन्दोलन कर रहे हो इससे अमन-चैन हरगिज नहीं आ सकता।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;समय किसी का इन्तजार नहीं करता। जो समय से काम ले लेते हैं वहीं बुद्धिमान होते हैं। जो समय चूक जाते हैं उनको बाद में पछताना पड़ता है। प्रेमियों से बाबा जी ने कहा कि दुनियां अब और बिगड़ने जा रही है। भारी परिवर्तन होगा। छोटा-मोटा विनाश नहीं होगा। जिनको प्रभु प्राप्ति का मार्ग मिला है उन्हें मेहनत और लगन के साथ भजन ध्यान में लग जाना चाहिऐ। भजन करोगे तो समय जो खराब आ रहा है वह पार हो जाऐगा और तकलीफें बगल से निकल जाऐंगी। आंच तो आऐगी जरूर किन्तु जलने से बच जाओगे। अच्छे कर्म करोगे तो महात्माओं की दया हो जाऐगी और बचाव हो जाऐगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जी ने फिर कहा कि इस बात को याद करते रहें कि जब कभी सृष्टि में अधर्म फैल जाता है, सृष्टि के लोग चरित्रहीन हो जाते हैं और बुद्धि का विवेक समाप्त हो जाता है तब कोई न कोई महान आत्मा का आना इस संसार में होता है और फिर एक आवाज देश में लगती है। भारत धर्म प्रधान देश है। यहां की विभूतियां विश्व को नचाया करती थीं और अब वही समय आगे आ रहा है। आवाज लग चुकी है इसमें दो राय नहीं है। हारकर, मजबूर होकर तुम्हें महात्माओं के पास जाना होगा तभी कुछ होगा। जो भौतिक विकास द्वापर में था वह आज कलयुग में अभी नहीं हुआ है। भारत की आध्यात्मिक शक्ति के आगे कोई भी देश टिक नहीं सकता। तुम करके देख लो। अगर विश्व के सारे राष्ट्र एक साथ मिलकर अपने आणविक हथियारों के साथ भारत पर आक्रमण करें फिर भी वो जीत नहीं पायेंगे। मानव शरीर अनमोल है। स्वासों की पूंजी गिनकर तुम्हें मिली है। जहां आखिरी स्वांस खत्म हुई कि यह शरीर धड़ाम से पृथ्वी पर गिर जाऐगा। तुम्हें रास्ता मिला है तो भजन करो और जीते जी शरीर से अलग होकर मीराबाई की तरह ऊपर के दैविक मण्डलों में चढ़ चलो। उधर खुले हुऐ सुन्दर-सुन्दर देश हैं, स्वर्ग है, बैकुण्ठ है, देवी-देवता मिलते हैं। वहां तकलीफ नहीं, आनन्द ही आनन्द है। इसी कलयुग में कबीर साहब, नानक जी, गोस्वामी तुलसीदास जी, रैदास जी आदि महात्माओं ने तमाम जीवों को उन आध्यात्मिक मण्डलों में पहुंचा दिया। तुम भी जा सकते हो बशर्ते ऐसे पूरे अनुभवी गुरू मिलें तब। इसी कलयुग में मीराबाई ने अपने सुरत को बताते हुऐ कहा किः-&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;मीरा मानी सुरत सैल असमानी।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जब जब सुरते परे वा घर की ,&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;पल पल नैनन पानी।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;रात दिवस मोंहि नींद न आवै,&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;भावे अन्न न पानी।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;ऐसी पीर उठी तन भीतर,&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कसक कसक कसकानी।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;रैदास संत मिले मोहिं सतगुरू&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;दीन्हा सहज सुखदानी।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;मैं मिलि जाय, पाय पिय अपना,&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;तब मोरी पीर बुझानी।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;खाक सलक सिर&amp;nbsp; डारी,&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;निज घर अपना जानी।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;br&gt;www.jaigurudevworld.org&lt;br&gt;&lt;br&gt;
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=555</link><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 03:17:03 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; कुछ विदेश के लोग मथुरा में 
जयगुरूदेव मन्दिर को दखने आऐ और बाबा जयगुरूदेव जी महाराज से मिलने की 
इच्छा लिए बाबा जी की कुटी में गऐ। सफेद वस्त्र में बाबा जी के भव्य रूप को
 वे देखते ही रह गऐ। पूछने पर उन्होंने बताया कि इस स्थान पर चुम्बक जैसा 
खिंचाव हो रहा है। बाबा जी ने हाथ जोड़कर सबका अभिवादन किया। यह भी कहा कि 
मालिक का दर्शन दीदार करने की अगर इच्छा है तो शाकाहारी होना जरूरी है। दिल
 में दया भाव रहेगा तभी वह परमात्मा रहम करेगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;महाराष्ट्र से आऐ तीर्थ 
यात्रियों को सम्बोधित करते हुऐ बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने कहा कि भारत 
संतों-महात्माओं का देश है। यहां जब भी गड़बड़ी होती है लोग मानवधर्म-कर्म, 
नैतिकता त्याग देते हैं तब कोई न कोई ऐसी शक्ति, ऐसा महापुरूष पैदा होता है
 तो धर्म की स्थापना फिर से करता है। अधर्म का विनाश हो जाता है। सतयुग, 
त्रेता, द्वापर सभी युगों का इतिहास है। अभी कुछ ही दिनों में आप प्रतीक्षा
 करेंगे कि कोई आकर न्याय, नैतिकता, प्याय-मुहब्बत का संदेश सुनाऐ। इतिहास 
बताता है कि ऐसी शक्तियां समय-समय पर आईं और उन्होंने लोगों को समझाया। जो 
मान गएग उनकी रक्षा हुई। याद रखिऐ कि बिना धर्म के सेवा, सदाचार, न्याय, 
शान्ति, चरित्र नहीं आऐगा और न ही सन्तोष होगा। कहा है किः-&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जब आवे सन्तोष धन, सब धन धूर समान।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;इतिहास बताता है कि बड़े-बड़े 
राजे-महाराजे महात्माओं के पास गऐ, उनके संदेशों को सुना और समझा। जब 
सन्तोष आ गया तो राज्य त्याग दिया। किसी-किसी ने राज्य पर ठोकर मारकर जंगल 
की राह पकड़ ली और प्रभु प्राप्ति की साधना में लग गऐ। महात्माओं की सन्तोष 
धन की शिक्षाऐं परम्परा से चली आ रही हैं पर आज ऐसा समय आ गया है कि जिस 
मानवता की विद्याऐं प्राप्त करने पर मनूष्य मनुष्य कहलाता था उसको सबने 
त्याग दिया। अब भोग विद्या में सब लग गऐ जिससे मन, बुद्धि, चित्त मलीन हो 
गऐ और आत्मा गंदी हो गई। उसकी सफाई के लिए बाहर की अग्नि, वायु, पानी, 
साबुन नहीं है। उसकी सफाई के लिए आध्यात्मिक विद्या चाहिऐ और बिना इसके अब 
किसी को भी शान्ति नहीं मिलेगी।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
info@jaigurudevworld.org&lt;br&gt;
www.jaigurudevworld.org

</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=554</link><pubDate>Sun, 07 Mar 2010 05:12:31 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; कुछ विदेश के लोग मथुरा में जयगुरूदेव मन्दिर को दखने आऐ और बाबा जयगुरूदेव जी महाराज से मिलने की इच्छा लिए बाबा जी की कुटी में गऐ। सफेद वस्त्र में बाबा जी के भव्य रूप को वे देखते ही रह गऐ। पूछने पर उन्होंने बताया कि इस स्थान पर चुम्बक जैसा खिंचाव हो रहा है। बाबा जी ने हाथ जोड़कर सबका अभिवादन किया। यह भी कहा कि मालिक का दर्शन दीदार करने की अगर इच्छा है तो शाकाहारी होना जरूरी है। दिल में दया भाव रहेगा तभी वह परमात्मा रहम करेगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;महाराष्ट्र से आऐ तीर्थ यात्रियों को सम्बोधित करते हुऐ बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने कहा कि भारत संतों-महात्माओं का देश है। यहां जब भी गड़बड़ी होती है लोग मानवधर्म-कर्म, नैतिकता त्याग देते हैं तब कोई न कोई ऐसी शक्ति, ऐसा महापुरूष पैदा होता है तो धर्म की स्थापना फिर से करता है। अधर्म का विनाश हो जाता है। सतयुग, त्रेता, द्वापर सभी युगों का इतिहास है। अभी कुछ ही दिनों में आप प्रतीक्षा करेंगे कि कोई आकर न्याय, नैतिकता, प्याय-मुहब्बत का संदेश सुनाऐ। इतिहास बताता है कि ऐसी शक्तियां समय-समय पर आईं और उन्होंने लोगों को समझाया। जो मान गएग उनकी रक्षा हुई। याद रखिऐ कि बिना धर्म के सेवा, सदाचार, न्याय, शान्ति, चरित्र नहीं आऐगा और न ही सन्तोष होगा। कहा है किः-&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जब आवे सन्तोष धन, सब धन धूर समान।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;इतिहास बताता है कि बड़े-बड़े राजे-महाराजे महात्माओं के पास गऐ, उनके संदेशों को सुना और समझा। जब सन्तोष आ गया तो राज्य त्याग दिया। किसी-किसी ने राज्य पर ठोकर मारकर जंगल की राह पकड़ ली और प्रभु प्राप्ति की साधना में लग गऐ। महात्माओं की सन्तोष धन की शिक्षाऐं परम्परा से चली आ रही हैं पर आज ऐसा समय आ गया है कि जिस मानवता की विद्याऐं प्राप्त करने पर मनूष्य मनुष्य कहलाता था उसको सबने त्याग दिया। अब भोग विद्या में सब लग गऐ जिससे मन, बुद्धि, चित्त मलीन हो गऐ और आत्मा गंदी हो गई। उसकी सफाई के लिए बाहर की अग्नि, वायु, पानी, साबुन नहीं है। उसकी सफाई के लिए आध्यात्मिक विद्या चाहिऐ और बिना इसके अब किसी को भी शान्ति नहीं मिलेगी।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;br&gt;www.jaigurudevworld.org
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=553</link><pubDate>Sun, 07 Mar 2010 05:10:11 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; बाबा जयगुरूदेव जी महाराज चुप हैं, गम्भीर हैं। महात्मा जब बोलते रहते हैं, सत्संग करते रहते हैं तब तक कुदरत शान्त रहती है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;पद को लेकर बिहार में कांग्रेसियों में संघर्ष हो गया। मारपीट, मारामारी, लाठीचार्ज तो आजकल आम बात हो गई है। चाहे विधायक हों या संसद सदस्य हो या मंत्री हों लाठियां घूम जाती हैं। विरोध प्रदर्शन एक हथियार बन गया है चाहे नतीजा कुछ भी न निकले।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि चीनी पर सरकार चूक गई। केन्द्र की विफलता से बढ़ी कीमत। संसद में विपक्ष के हमलों के बीच उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है और सरकार चिंतित है और आवश्यक कदम उठाये गए हैं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बात पुरानी है। कांग्रेस के वरिष्ठ मंत्री जगजीवन राम जी एक बार बाबा जयगुरूदेव जी महाराज से मिलने मथुरा आश्रम आऐ। आश्रम की कुटी में उन्होने काफी समय बिताया और बातें कीं। भेंट के दौरान उन्होंने बाबा जयगुरूदेव जी महाराज से कहा कि ‘महाराज जी! मेरे पास इतनी संपत्ति है कि मेरी सात पुश्तें बैठकर खा सकती हैं।’ बाबा जी ने कहा कि अब आप राजनीति छोड़ दीजिऐ और आराम से घर में रहिऐ। यह सुनकर उन्होंने कहा कि ‘अगर मैं राजनीति छोड़ दूंगा तो मुकदमों से घिर जाऊँगा।’&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि जब नैतिकता की कमी हो जाती है तो चीजों की कमी हो जाने लगती है। नैतिकता के भाव में बड़ा बोध है, ज्ञान है और शक्ति है उसे छोड़ दिया। अपनी पारिवारिक व्यवस्था को, सामाजिक व्यवस्था को चन्द दिनों में ही बिगाड़ दिया। मनुष्य अपनी कर्म करने की आजादी से आबाद होता है और अपने कर्म करने की आजादी से बर्बाद हो जाता है। दोनों ही मनुष्यों के कर्म पर निर्भर करता है। जब मनुष्य बर्बाद होने लगाता है तब महात्माओं की जरूरत पड़ती है। ऐसी दशा में शान्ति की, प्यार की और मोहब्बत की जब आवाज लगती है, उसकी भनक पड़ती है तो वह उस तरफ दौड़ पड़ता है। इसलिए वह आवाज जन-जन तक पहुंचना चाहिए। &lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;इस मैदान में जितने भी लोग आऐ उनको लाभ हुआ है। हम समझते हैं कि जिनको लाभ हुआ उन्होंने समझा है। इसी प्रकार आप लगे रहो तो यह अंधकार खत्म हो जाऐगा। इसके लिए महात्माओं को मेहनत करनी पड़ती थी, करनी पड़ेगी। वह मेहनत की जाऐगी।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;br&gt;www.jaigurudevworld.org
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=552</link><pubDate>Sat, 06 Mar 2010 05:21:14 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आज आश्रम पर मन्दिर और गुरू महाराज का दर्शन करने के लिए कुछ कॉलेज के छात्र आऐ। बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने कॉलेज के छात्रों से कहा कि आज देश को अच्छे लोगों की जरूरत है, त्यागी लोगों की जरूरत है। समाज को, परिवार को तपस्वी, सदाचारी आदमी की जरूरत है, अगर तपस्वी, त्यागी, सदाचारी ये तीनों आ गए तो देश का बहुत बड़ा उत्थान हो जाऐगा, नवनिर्माण हो जाऐगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;काशमीर में आतंकवादी घुस आऐ और पता नहीं चला। सेना के साथ मुठभेड़ में दोनों तरफ के लोग मारे गऐ, घायल हुऐ। साथ ही भारतीय सेना के एक बड़े अधिकारी का अपहरण हो गया। छुड़ाने की बातचीत चल रही है। भारत जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाता। त्रेता में रावण के पास दूत भेजकर&amp;nbsp; राम ने समझाने की कोशिश की थी। यही हाल द्वापर में हुआ। समझाने का क्रम चलता रहा और जब कौरव एक इंच भी जमीन पाण्डवों को देने को तैयार नहीं हुऐ तो महाभारत हो गया। वर्तमान में भी बातचीत का क्रम चल रहा है, इतिहास के पन्ने लिखे जा रहे हैं। अगर सफलता नहीं मिली तो कुछ न कुछ तो होना है ही। अखबार रेडियो चिल्ला रहे हैं कि सन् 2012 तक विनाश हो जाऐगा। तमाम भविष्यवाणियों की चर्चा हो रही है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने वर्ष 1952 से ही जो कुछ कहा है उन वाक्यों की गीता और रामायण बन रही है। बाबा जी ने वर्ष 1975 में सुभाषजयन्ती के अवसर पर कानपुर के फूलबाग के मैदान में 32 फिट ऊँचे मंच से ललकारते हुऐ कहा था किः-&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; font-weight: bold; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;सुख धरम करम यदि लाना है&lt;br&gt;हिजड़ों का राज हटाना है&lt;br&gt;ये व्याभिचारी पापाचारी &lt;br&gt;मां, बहनों की चलन बिगाड़ी&lt;br&gt;पापियों से देश बचाना है।&lt;br&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: normal; color: rgb(0, 0, 170);"&gt;फिर कहा किः-&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;भारत के वीर जवानों जागो&lt;br&gt;जनता तुम्हें पुकारती&lt;br&gt;दुख में तुम्हें पुकारती&lt;br&gt;मंहगाई में तुम्हें पुकारती&lt;br&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;span style="font-weight: normal;"&gt; &lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;फिर आगे कहा किः-&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;वक्त बदलने वाला है&lt;br&gt;जनता जगने वाली है&lt;br&gt;बच्चे आने वाले हैं&lt;br&gt;न्याय अली के बच्चों में,&lt;br&gt;कुछ खटपट मचने वाला है&lt;br&gt;कतल अली बौराये आऐ &lt;br&gt;कतल कर दिया भाई का&lt;br&gt;चले सिफारिश अली छुड़ाने&lt;br&gt;झूठ न छिपने वाला है&lt;br&gt;भण्डा फूटने वाला है।&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने कहा कि खुदा की कचहरी में हर इन्सान की फाइल खुली है। जो कुछ भी अच्छा-बुरा वो करता है वह सब भगवान के कर्मचारी नोट करते रहते हैं। मौत के बाद धर्मराय के दरबार में उसी के आधार पर फैसला सुना दिया जाता है। बुरे एवं पाप कर्मों के लिए जीवात्माऐं नर्कों तथा चौरासी लाख योनियों में भेज दी जाती हैं। वहां रिश्वत नहीं चलती, सिफारिश नहीं चलती है।&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; अब तुम सोच लो।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;br&gt;www.jaigurudevworld.org
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=551</link><pubDate>Fri, 05 Mar 2010 05:28:34 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; मथुरा के मधुबन क्षेत्र में जयगुरूदेव होली मेले का सिमटाव लगभग हो चुका है। रात में बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने बचे हुऐ प्रेमियों को घूम-घूमकर जगाया और दर्शन-आशीर्वाद दिया। पांच दिन तक चले होली कार्यक्रम में यह पहला अवसर है जबकि सत्संग नहीं हुआ और न ही नामदान दिया। इसका क्या संकेत है यह तो भविष्य ही बताऐगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;दिल्ली में मंहगाई को लेकर राजनीतिक पार्टियों में घमासान मचा हुआ है। लोकसभा में सभी पार्टियां वोटों की संख्या गिन रही हैं। सरकार भयभीत सी दिखाई दे रही है। रात को कुछ और सवेरे कुछ और नजारा न दिखाई दे इसका सबमें भय व्याप्त है। सब अपना-अपना अनुमान लगा रहे हैं कि क्या होगा। एक नेताजी ने कहा कि सुबह राम को राजतिलक होना था जो देवताओं को मंजूर नहीं था और पौ फटते ही राम सीता और लक्षमण को लेकर जंगल चले गऐ।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि सभी सत्संगी राजनीति और आलोचनाओं से दूर रहें। अगर सत्संग वचनों को भूलकर इनकी उनकी बखिया उधेड़ने में लगे रहोगे तो भारी पर्दे जीवात्मा पर आऐंगे और भजन नहीं बनेगा, ध्यान में एकाग्रता नहीं आऐगी। कुदरत अपनी बौखलाहट में कुछ भी कर सकती है। जमीन से, हवा से, समुद्र से कहीं से भी कुछ भी हो सकता है। त्राहिमाम, त्राहिमाम जब मचेगा तब भगवान याद आऐगा। मैं बहुत दिनों से समझा रहा हूं कि शाकाहारी हो जाओ, शराब पीना बन्द करो। शराब ऐसा नशा है कि मां-बहन, बेटी की पहचान खत्म कर देता है। खुदा का दीदार करने वाले फकीरों से जब प्यार हो जाता है तब इन्सान मौत को कुछ नहीं समझता। कहा है कि मन्सूर सूली पर चढ़ गया लेकिन हक (भगवान) को नहीं छोड़ा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 85);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;‘‘चढ़ा मन्सूर सूली पर, न छोड़ा हक’’&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;शम्स तबरेज पूरे महात्मा थे। जब बहुत अनुरोध करने पर उन्होंने बादशाह के बेटे को जिला दिया तो इतिहास कहता है कि उनकी खाल ख्ंिाचवा ली गई। मुल्ला-मौलवियों ने कहा कि ये अपने को खुदा से भी ऊपर समझता है। उन्होंने बादशाद से कहा कि मैं तो जानता था कि तू क्या करेगा। ये जिस्म तो मिट्टी है और मैंने इसे पहले से छोड़ रखा है। मैं तो जा रहा हूं तू इसे दफना दे या खाल खिंचवा ले मुझ पर कोई असर आने वाला नहीं। कबीर साहब ने कहा है किः-&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(0, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जा मरने से जग डरे, मेरे मन आनन्द।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;मरने ही ते पाइये, पूरन परमानन्द।।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;संतमत की साधना ही जीते जी मरने की है। भजन में जीवात्मा शरीर से अलग हो जाती है और ऊपर के रूहानी मण्डलों स्वर्ग, बैकुण्ठ आदि का सफर करती है और फिर वापस शरीर में आ जाती है। बाबा जयगुरूदेव जी महाराज सत्संगीयों से बराबर कहते हैं कि भजर करो और इस काल के देश से निकल चलो। मीराबाई ने कहा कि भजन में मेरी जीवात्मा ने शरीर से अलग होकर आसमानों की सैर की। उन्होंने कहा कि&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;‘‘मीरा मन मानी सुरत सैल असमानी।’’&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;अंत में कहती हैं किः-&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;‘‘मैं मिलि जाय पाय पिय अपना, तब मोरि पीर बुझानी।’’&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;br&gt;www.jaigurudevworld.org
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=550</link><pubDate>Thu, 04 Mar 2010 06:32:02 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;div style="text-align: center; color: rgb(255, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जयगुरूदेव समाचार&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170); font-weight: bold;"&gt;3 मार्च 10&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;मथुरा में जयगुरूदेव मेला सिमट रहा है। बाबा जयगुरूदेव जी महाराज थोड़ी-थोड़ी देर में कुटी से बाहर आकर प्रेमियों को बराबर दर्शन देते रहे। एक प्रान्त में सेना के हवाई शो के दौरान एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और आबादी वाले क्षेत्र में गिरा जिससे पूरी बिल्डिंग ही उड़ गई।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;एक सत्संगी ने अपने स्वप्न के बारे में बताते हुऐ कहा कि उन्होंने एक स्वप्न देखा कि वे हरिद्वार में हरि की पौढ़ी पर गंगा के किनारे खड़े हैं। पौढ़ी पर बुझे हुऐ दीपकों का एक ढेर पड़ा है और वहां बाबा जी हाथ में बेलचा लिए हुऐ हैं तथा बेलचे से उन बुझे हुऐ दिपकों को गंगा में प्रवाहित कर रहे हैं। यह सुनकर एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि बहुत दिनों पहले बाबा जी ने सत्संग में कहा था कि उन्होंने एक स्वप्न देखा है। स्वप्न तो याद नहीं है पर बाबा जी की इतनी बात याद है कि बाबा जी का स्वप्न कभी झूठा नहीं होता।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;रामायण की एक चौपाई है जिसमें गोस्वामी जी महाराज ने लिखा है किः-&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;सपने बानर लंका जारी,&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जातुधान सेना सब मारी।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;होइहें सत्य गए दिन चारी,&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;यह सपना मैं कहौं विचारी।।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;यह लंका की अशोक वाटिका में सीताजी की रखवाली करने वाली त्रिजटा राक्षसी का था जिसने सीता जी को सुनाया था। इसका जिक्र करते हुऐ बाबा जी ने कहा था कि अगर त्रिजटा राक्षसी का स्वप्न सच हो सकता है तो मेरा स्वप्न झूठा नहीं होगा। यह संदेश बाबा जी का आपातकाल लगने के पहले का है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;दूरदर्शन पर दिखाया और बताया जा रहा है माया सभ्यता की भविष्यवाणियों और बाइबिल की भविष्य वाणियों को कि 2012 तक महाप्रलय हो जाऐगी और विश्व की आबादी थोड़ी रह जाऐगी। अमेरिका, रूस की तरह 6 भागों में बंट जाऐगा, भारी जनहानि होगी। वर्ष 2010 में ही भारत में ऐसा भूकम्प आऐगा कि पिछले सप्ताह चिली में आऐ भूकम्प को पीछे छोड़ देगा। महात्मा सूरदास जी की भविष्यवाणी अकाट्य है जिसमें उन्होंने कहा है किः-&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;रे मन धीरज क्यों न धरे।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;संवत दो हजार के ऊपर छप्पन वर्ष चढ़े।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;माघ मास संवत्सर व्यापै, सावन ग्रहण परे।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;उड़ि विमान अम्बर में जावे, गृह-गृह युद्ध करे।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;मारूत विष फैंके जग माहिं परजा बहुत मरे।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;द्वादस कोस शिखा हो जाकी, कंठ कू तेज भरे।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;सूरदास होनी सो होई, काहे को सोच करे।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;रे मन धीरज क्यों न धरे।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने कहा है कि सब लोग झगड़े-झंझट से दूर रहकर भजन करें। भजन करोगे तो तकलीफों की आंधी जब आऐगी तो बगल से होकर निकल जाऐगी और तुम बच जाओगे। पाप बहुत बढ़ गया है। अगर लोग धर्म के रास्ते पर नहीं चलते हैं तो कुदरत के एक तमाचे में बीसों करोड़ लोगों का सफाया हो जाऐगा।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;br&gt;www.jaigurudevworld.org
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=549</link><pubDate>Wed, 03 Mar 2010 10:30:08 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; मथुरा में जयगुरूदेव आश्रम पर होने वाले वार्षिक होली मेला का कार्यक्रम आज पांचवें दिन सम्पन्न हो गया। बाबा जयगुरूदेव जी महाराज के आदेश से श्री उमाकान्त तिवारी जी ने प्रतिदिन गुरू महाराज के संदेशों को सुनाया। गुरू महाराज ने आऐ हुऐ नऐ-पुराने प्रेमियों को बराबर घूम-घूमकर दर्शन दिया। गुरू महाराज कभी अस्वस्थ तो कभी बिलकुज ठीक मौज में दिखाई देते रहे। महात्माओं का स्वस्थ-अस्वस्थ रहना उनकी मौज-मर्जी पर होता है। कुछ लागों ने अपनी-अपनी बातों को जब बताया तब गुरू महाराज ने कहा कि घबराने की बात नहीं है दो वर्ष के अन्दर कुदरत की तरफ से सबकुछ ठीक हो जाएगा। सब लोग साधन-भजन रोज-रोज करें और बुरे कार्यों से बचें वर्ना कुदरत अब माफ नहीं करेगी। काफी लोग अपने-अपने घरों को लौट गऐ हैं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;गुरू महाराज ने कहा कि जिन्हें नामदान मिल चुका है उन्हें अन्तरमुखी होकर तीसरे तिल पर अपनी बैठक बनाकर सुरत-शब्द की साधना करनी चाहिए। कलयुग में प्रभु के पास पहुंचने का यह सुलभ मार्ग है। परमात्मा जीते जी लोगों को मिलता है मरने के बाद नहीं। समय भारत और विश्व के लिए दुखदाई है। राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक तथा जातियों के अभूतपूर्व उथल-पुथल होंगे। विश्व धार्मिक रूप से बदलेगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;भारत की भूमि कर्मभूमि है। विदेश भोगभूमि है और वहां भोग भोगने के बाद लोग नर्कों में चले जाते हैं। आगे मुसीबत और आफत आने वाली है। भगदड़ मचेगी। जब महात्माओं की खिल्ली उड़ाते हैं तो समझ को कि बुरे दिन आने वाले हैं। भजन करोगे तो आफत और तकलीफें बगल से निकल जाऐंगी। जब रास्ता मिल गया है तो घाट पर बैठकर जीवात्मा को सुरत को जगा लेना चाहिऐ। जब मन, बुद्धि, चित्त, साधक का साथ देंगे तो जीवात्मा जाग जाऐगी।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;br&gt;www.jaigurudevworld.org
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=548</link><pubDate>Tue, 02 Mar 2010 12:13:35 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; मथुरा का पूरा मधुवन क्षेत्र जयगुरूदेवमय हो गया है। होली के अवसर पर बाबा जयगुरूदेव जी महाराज के प्रेमियों की भीड़ के सारे पिछले रिकॉर्ड टूट गए। चार दिनों में बाबा जी ने चारों तरफ घूम-घूमकर श्रद्धालुओं को दर्शन दिया। बाबा जी की गाड़ी के साथ चार-पांच गाड़ियां चलती थीं जिसमें रांची के डॉक्टर एस. कुमार की भी गाड़ी रहती थी। डॉक्टर साहब बाबा जी का इलाज कर रहे हैं और प्रतिदिन सुबह-शाम भोजन के समय जाकर दवा देते हैं। बाबा जी अपनी कुटी में तो कभी बाहर तो कभी पैट्रोल पम्प पर भोजन लेते हैं। बाबा जी के सेवादारों की युवक टीम हर समय मुस्तैद रहती है। रात हो या दिन हो जब भी मौज हुई बाबा जी राष्ट्रीय राजमार्ग पर तो कभी दिल्ली की तरफ तो कभी आगरे की ओर निकल जाते हैं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;अपने संदेश में बाबा जी ने कहा कि तुम्हें रास्ता यानी नामदान मिल गया है। तुम्हें चाहिए कि मेरे सामने भजन कर लो। अगर चूक गए तो बहुत पछताना होगा। खान-पान पर ध्यान रखो, अशुद्ध खान-पान की छुआछूत जब लग जाऐगी फिर भजन-घ्यान में बाधा होने लगेगी। शरीर का कोई भरोसा नहीं। किसी भी दिन किसी भी क्षण जहां स्वांसें पूरी हुईं कि जीवात्मा शरीर से अलग हो जाऐगी। जीवात्मा दोनों आंखों के पीछे बैठी है। जीवात्मा में&amp;nbsp; अपार शक्ति है और उसका जलवा भजन-ध्यान में दिखाई देता है। उसकी लहर शरीर के अन्दर के श्रोतों से जुड़ी है इसीलिए आंख, नाक, कान सब काम कर रहे हैं। सारा खेल स्वांसों का है जो गिनती की आपको मिली हुई हैं। &lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जी को समाचार में बताया गया कि अभी हाल में पाकिस्तान के साथ सचिव स्तर की बातचीत के बावजूद एक इस्लामी संगठन के प्रमुख ने कहा है कि अगर भारत बातचीत को तैयार नहीं होता तो पाकिस्तान को हर कीमत पर युद्ध करना होगा। भारत युद्ध चाहता है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जी ने कहा कि समय अच्छा नहीं है। कुदरत बौखलाई हुई है और कभी भी कुछ भी कर सकती है। बीच में महात्मा खड़े हैं इसी लिए देर हो रही है वर्ना अब तक कुछ का कुछ हो गया होता। जो धर्म के रास्ते पर चलते हैं उनकी सम्हाल हो जाती है बाकी बुरे लोग पिस जाते हैं। सभी लोग अपनी-अपनी धर्म पुस्तकों को दखें कि उनमें क्या-क्या लिखा है। चोदहवीं सदी का भी जिक्र आया है। एक भविष्यवक्ता ने कहा किः-&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;पाकिस्तान का नाम मिटेगा,&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;राजनीति बिनसाऐगी।&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;दिल्ली का तख्ता पलटेगा,&lt;/span&gt;&lt;br style="font-weight: bold;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;अब ऐसी आफत आऐगी।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;info@jaigurudevworld.org&lt;br&gt;www.jaigurucdevworld.org
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=547</link><pubDate>Mon, 01 Mar 2010 10:59:35 GMT</pubDate></item></channel></rss>