﻿<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?><rss version="2.0"><channel><title>जयगुरूदेव समाचार</title><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/RSS.aspx</link><description>This will not shown in the page.</description><copyright>© 2010 Jaigurudev Ashram. All Rights Reserved.</copyright><ttl>180</ttl><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; प्रातः परम पूज्य स्वामीजी महाराज ने सत्संग दिया और पिछले महात्माओं और जीवों का अनुपम उदाहरण देते हुऐ समझाया कि जिस प्रकार करिया, सैनी, नैनू आदि ने लगन से और मेहनत से साधना करके अपनी जीवात्मा को जगा लिया उसी प्रकार आप भी अपनी जीवात्मा को जगाकर इसी जन्म में अपने घर पहंुचा दो। गुरू तो नौका लिए घाट पर हर समय तैयार है पर आपको घाट तक आना होगा। यही डगर पनघट की है जो थोड़ा कठिन है। किन्तु आप जब इस डगर पर मन को रोककर चलोगे तो आपको घाट भी जरूर मिल जाऐगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;परम पूज्य स्वामी जी महाराज ने कहा कि जब तक आप लोग यहां रहेंगे तब&amp;nbsp; तक रोज सत्संग होता रहेगा। सेवाओं का काम चल रहा है। सिमटाव का काम हो रहा है जिसमें सेवादार लगे हैं। सभी जिलों के सेवादारों से अपील है कि आप भी जब अपने कैम्प को छोड़ें तो अपने आस-पास सफाई करके ही जाऐं। स्वच्छ वातावरण होगा तो सभी के मन भी स्वच्छ होंगे और समाज में एक नया संदेश जाऐगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;font size="4"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;बीते हुऐ दिन-साधकों को हिदायत&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/font&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने साधकों को बताया कि साधन पर बैठने के पहले साधकों का इरादा पक्का होना चाहिए। साधन में जब मन न लगे तो खूब रोया करो। इसके पश्चात जब तुम बैठोगे तो मन शान्त हो जाऐगा। मन का स्वभाव है हरकत करने का। विवेक से यह मन शान्त जरूर रह सकता है वरना इसका रूकना असम्भव है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;दोनों आंखों के पीछे मध्य भाग में जीवात्मा बैठी हुई है। तुम बिलकुल सामने एक टक देखते रहो। यह तुम्हारी बाहर की आंखें बराबर बंद रहनी चाहिऐं। अन्तर में पहले तुम्हें अंधेरा दिखाई पड़ेगा। देखते-देखते रोशनी प्रकट हो जाऐगी। जिस वक्त रोशनी का बिन्दु पड़ने लगे तो तुमको चाहिऐ कि अपनी निगाह बिन्दु पर रखो और ऐसी कोशिश करो कि तुम्हारी दृष्टि हिले-डुले नहीं। इसी बिन्दु में होकर देखते रहो फिर प्रकाश का समूह दिखाई देने लगेगा। आगे नीले रंग का आकाश है और प्रकाश सफेद है। इस आकाश में अनेक प्रकार की इच्छाऐं प्रकट हो जाती हैं। इन्हीं वासनाओं के जागने से साधक गिर जाता है और यदि गुरू न हो तो बचना अति दुष्कर हो जाता है। जब वासना का वेग जग जाता है उस वक्त गुरू याद नहीं आता है। गुरू की सेवा हमने लाखों बार की हो और गुरू की सूरत का हम हर रोज ध्यान करते हों फिर भी इन्द्रियों के मण्डल में पहुंचने पर साधक की इच्छाऐं जाग जाती हैं और यदि उस वक्त प्यारा गुरू सामने खड़ा भी हो तो वह दुश्मन की भांति नजर आता है। विकारी अंगों की वजह से हम गुरू को अधूरा समझते हैं। गुरू का ध्यान, सुमिरन करना तो दूर रहा उल्टा उसे गाली देना शुरू कर देते हैं और गुरू का मार्ग भी छोड़ देते हैं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;जब विकारी अंग इन्द्रियों के जागते हैं उस वक्त यह इच्छा होती है कि सुन्दर स्त्रियां मिलें और हम उनके साथ रहें। सौ में से एक बचता है वह भी गुरू का सहारा लेकर नहीं तो लाख में से एक बचता है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;jaigurudevnews@yahoo.com&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;www.jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=702</link><pubDate>Thu, 29 Jul 2010 12:44:48 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आज परमपूज्य स्वामी जी महाराज ने प्रातः सत्संग दिया। अपने संदेश में गुरू महाराज ने सभी को शाकाहारी होने और बराबर भजन करने का आदेश दिया। सुरत यहां काल के जाल में फंसी है, कर्मों का बोझ रोज आपकी जीवात्मा पर बढ़ता जा रहा है फिर भी मानव को होश नहीं है कि यहां से निकलना है और फिर यह मौका नहीं मिलेगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;सेवादार बराबर यहां बने हुऐ हैं सेवाओं का काम जारी है। मेला क्षेत्र से सभी विभाग अपना-अपना सामान समेट रहे हैं। सेवादारों का यहां पर इस समय बहुत ही जरूरी काम है। पूरे मेला क्षेत्र में सफाई का काम होना है। जिस प्रकार आरम्भ में आपको यह मैदान मिला था उसी प्रकार इसे साफ करके छोड़ना है। यह एक ऐसा आचरण है जिससे समाज में और भी जीवों को शिक्षा मिले और सभी अपने आस-पास साफ-सफाई रखें।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;बीते हुऐ दिन (सूरत में 18 अप्रैल 1974)&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;सूरत में 18 अप्रैल 1974 को बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने बताया कि देश में धर्म का जन-जागरण हो रहा है। इस मानव प्रेम इन्सानियत मुहब्बत के जन-जागरण में सभी एक सूत्र में बंधते चले जा रहे हैं। नर-नारी बच्चे प्यार से प्यासे हैं और जब इन्हें पानी मिलता है तो वे दौड़ पड़ते हैं। आश्चर्य है कि हिन्दुस्तान का कोई रेडियो अखबार नहीं बोलता है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आदमी एक काम करना जानता है कमाने का। माताओं पर आधिक भार है। निवेदन है कि जिम्मेदारी अधिक है। निवेदन है कि एकमात्र तुम यदि चैन अमन पाना चाहते हो तो खुदा पर, भगवान पर विश्वास करो पूजा करो और नेक काम करो। तुम्हें ताकत मिलेगी और सुख शांति की लहर आऐगी। महात्माओं की तालीम को हमने छोड़ दिया। केवल भोजन-कपड़ा मिल जाना चाहिऐ यह तो पशु-पक्षी भी करते हैं फिर आपकी इल्मीयत और ज्ञान क्या रहा ? देश के अन्दर विप्लव आ जाऐगा। धर्म से भी गऐ। अब न तो शारीरिक धर्म रहा और न तो आध्यात्मिक धर्म रह जाऐगा। अब वह दिन दूर नहीं है जब इन सबका परिणाम आपके सामने आऐगा। हर लोग किसी न किसी पर विश्वास रखते हैं चाहे कहीं रखें। हर कोई मजहब के साथ, धर्म के साथ बंधा हुआ जरूर है। बाबा जी की पुकार आत्मा के कल्याण के लिए है। समय नाजुक है जिन्दगी थोड़ी है अपने लिए कब काम करोगे? आध्यात्मिक जिन्दगी बना लो वह एक स्वतन्त्र जिन्दगी है, प्रेम जिन्दगी है उसमें दुख नहीं, मरना नहीं। गृहस्थ जीवन में सभी काम-काज करते हुऐ उस जिन्दगी को जगा लेते हैं। उन विभूतियों को, शक्तियों को प्राप्त क्यों नहीं करते जिससे यह काल कलेश का, जन्म-मरण का दुख समाप्त हो जाऐ ?&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;मैंने हिन्दुस्तान में 20 करोड़ से ऊपर आदमियों को तैयार कर दिया है। अनमोल वस्तु किसानों एवं उनके बच्चों को पकड़ा रहा हूं। अब वे समझने लगे कि क्या करना चाहिऐ। मैं आध्यात्मिक हूं। प्रचार आध्यात्मिक करता हूं। हिन्दू हूं मुसलमानों से मुहब्बत करता हूं। तुमने अपनी-अपनी जुबान में उस परमात्मा का नाम रखा। तुम्हारी आंख नहीं खुली इसलिए ऐसा किया। वह यही कहेगा कि मैं तो पैगम्बर, फकीरों, महात्माओं को भेजता रहा तुम उनसे रास्ता पूछते। वहां आनन्द के सुन्दर-सुन्दर लोक हैं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;मैं मानव सेवा, आत्मा की सेवा करता रहा। यह किस तरह से होगा यह मैं अच्छी तरह जानता हूं। मैं धर्म का संदेश देता रहा किन्तु आपने मुझे जबर्दस्ती ढकेला कि बाबा जी राजनीति में आ गऐ। लाखों का दिव्य नेत्र खोल दिया। एक-एक स्थान पर कई-कई लाख की भीड़ होती है। अगर यह काम न होता तो इतनी भीड़ इस नीरस और सूखे संदेशों को सुनने के लिए न आती। तुमने आत्मा को सुला दिया, बुद्धि को सुला दिया, भौतिक बुद्धि जागे बिना आत्मा कैसे जागेगी ? तुमको आदेश है कि फकीरों, महात्माओं से मिलो योग और ध्यान अवस्था में बैठना। अन्दर में एक दरगाह, सैरगाह है यहीं ज्ञान चक्षु खुल जाऐगा तब लगेगा कि यह दुनियां क्षण भंगुर, नाशवान, भूल और भरम की है। जब तुम्हें आनन्द महसूस होने लगेगा तब तुम्हें कोई बहका नहीं सकेगा। मजहब के झगड़ों को मिटाकर प्रेम का पाठ पढ़ा कर सबको एक रास्ते पर चला रहा हूं। एक स्वार्थी को सौ बेवकूफों की अक्ल होती है और वह सबको धोखा देता है। ‘‘स्वारथ रत परिवार विरोधी।’’ वह अपने स्वार्थ के लिए दीवाना और पागल रहता है। स्वार्थ में आकर तुम हमको क्या समझ सकते हो। कुछ दिन बाद लोग समझने लगेंगे। धीरज का फल मीठा होता है। धैर्य रखकर महात्माओं की बात मान लो। अब लोग मानने लगे और सुनने लगे। भारतवर्ष सबसे उच्च देश है, धर्म प्राण भूमि है। महात्माओं के कदमों में पवित्रता है, निर्मलता है। आप सब मिटाना चाहते थे पर यह मिट नहीं सकता। जब आपको इच्छा हो रास्ता पूछ लीजिऐगा। जयगुरूदेव नाम के बाबा आपको रास्ता बता देंगे। राम नाम की मणि तुम्हारे अन्दर जल रही है, वह प्रकट हो जाऐगी और तुम्हारी आंख खुल जाऐगी। शारीरिक आराम चाहिऐ तब भी चले आना वह भी बाबा जी ठीक कर देंगे। भारतीय जनता पर मुझे पूरा विश्वास है। मैं विश्वास लेकर चला हूूं जनता का विश्वास महात्माओं के ऊपर और महात्मा का विश्वास उन पर है। समय आने पर यह भूमि अपना जलवा दिखाऐगी। ध्यान-भजन की प्रतिक्रिया में नर-नारी लगे रहेंगे। बाबा जी की मेहनत की इज्जत रखना। जब यहां से तुम जाने लगो तो आध्यात्मिक धन खड़ा हो जाये, जन्म-मरण न होने दे, पशु-पक्षियों की योनियों में न जाने दें। मौत के वक्त में अन्त में जयगुरूदेव नाम भगवान का उच्चारण करना। जब उसे होश आ जाऐ तो उससे पूछना कि कौन खड़ा है। मैं इधर भी साथ देता हूं और उधर भी साथ देता हूं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;राजनीतिज्ञोंने कहा कि ये कैन्डीडेट खड़ा कर रहे हैं। न मुझे राष्ट्रपति बनना न प्रधानमंत्री बनना, न एम.एल.ए. और एम.पी. बनना है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;jaigurudevnews@yahoo.com&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;www.jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=701</link><pubDate>Thu, 29 Jul 2010 12:27:31 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="color: rgb(255, 0, 0); font-weight: bold;"&gt;&lt;img src="http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/jgdfiles/Images/kafila_photos/7_27_2010___1__44__35___AM.jpg"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;font size="4"&gt;&lt;span style="color: rgb(85, 0, 0); font-weight: bold;"&gt;गुरूपूर्णिमा विशेष&lt;/span&gt;&lt;/font&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज गुरूपूर्णिमा पावन पर्व का सातवां व अंतिम दिन है। प्रातः काल 6 बजे परमपूज्य स्वामीजी महाराज ने नामयोग साधना मन्दिर के प्रांगण में बने सत्संग मंच से अपने शुद्ध आध्यात्मिक संदेश में कहा कि यह मानव तन तुमने पाकर इससे यदि अपनी जीवात्मा को जगाने का काम नहीं किया तो यह जा रहा है और फिर आपको नहीं मिलेगा। आपने इस अनमोल तन से संसार के कामों को किया और बराबर कर रहे हो। आपको सोचना चाहिऐ कि जितना आपने संसार को एकत्र किया है क्या वह आपके पास है? क्या आपको उससे सुख प्राप्त हो रहा है? आपने तो इसे ही अपना मान लिया। आपको सोचना चाहिऐ कि जब आप आऐ थे तो क्या साथ लाऐ थे। यहां जो भी सामान आप देख रहे हो वह सब उस ईश्वर ने पहले से ही आपके प्रयोग के लिए यहां भेज दिऐ हैं। यह इसलिए दिऐ गऐ कि आप जब संसार में आऐं तो इन सामानों से अपना काम ले लो और फिर इन्हें यहीं छोड़ दो। पर आपने सोचा कि यह हमारा है वह हमारा है। फंस गऐ इसमें और अब दुखों की पोटली बंध गई तो रोते हो। कभी आपने सोचा है कि कौन इन मुसीबतों से आपको बचाऐगा ? कौन दुखों के सागर से निकालेगा ? बस अंधे की तरह संसार में दौड़ रहे हो। याद रखो कि यह कर्मों का देश है और यहां आपको यह मानव तन इस लिए दिया गया है कि अबकी बार आप इस मानव तन में रहकर जल्दी से अपनी जीवात्मा को जगा लो और यहां से निकल चलो। यहां का कोई सामान आपका नहीं है इससे बस अपना काम ले लो और इससे अपने आप को बांधो नहीं। यहां से निकलने के लिए आऐ हो और जल्दी करो भजन कर लो और आगे यह समय भी नहीं मिलेगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;गुरू महाराज ने आगे कहा कि जिन जिलों और प्रान्तों में आप कार्यक्रम चाहते हैं उन जिलों के जिम्मेदार अपनी लिस्ट बना कर श्री उमाकान्त तिवारी जी को या स्वामी जी महाराज को दे दें।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;कार्यक्रम शान्ति से सम्पन्न हुआ इसके लिए स्वामी जी महाराज ने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं स्थानीय निवासियों का धन्यावाद किया।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;jaigurudevnews@yahoo.com&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;www.jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=700</link><pubDate>Tue, 27 Jul 2010 01:46:17 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="color: rgb(255, 0, 0); font-weight: bold;"&gt;&lt;img style="width: 191px; height: 217px;" src="http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/jgdfiles/Images/kafila_photos/7_26_2010___1__49__38___AM.JPG"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;font size="4"&gt;&lt;span style="color: rgb(85, 0, 0); font-weight: bold;"&gt;गुरू पूर्णिमा विशेष&lt;/span&gt;&lt;/font&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज गुरूपूर्णिमा पावन पर्व का छठा दिन है। आप प्रातः गुरू महाराज के आदेश पर श्री सतीश यादव जी ने गुरू संदेश सुनाया। गुरू की महिमा का वर्णन करते हुऐ श्री सतीश यादव जी ने कहा कि गुरू की महिमा अपरमपार है। ‘‘बिन गुरू भवनिधी तरै न कोई’’। बिना गुरू के कोई भी इस भव सागर से पार नहीं हो सकता। गुरू की दया से जीव उनसे रास्ता पाकर आगे चलता है बिना गुरू के एक पग भी आध्यात्म के रास्ते पर आगे नहीं बढ़ सकता है। आपको चाहिऐ कि गुरू की दया में रहें और गुरू आदेश का पालन करने को तत्पर रहें। सभी शाकाहारी रहें, किसी नशे की वस्तु का सेवन नहीं करें। मांस का आहार आध्यात्म के मार्ग की बहुत बड़ी रूकावट है। किसी जीव की हत्या करके उसके मांस का सेवन करना एक बड़ा अपराध है और इसकी बहुत बड़ी सजा नर्कों और फिर चौरासी में मिलती है। जिस प्रकार आपको कहीं से काटा जाऐ तो आपको दर्द होता है उसी प्रकार किसी जानवर के बच्चे को जब आप काटते हो तो उसे भी वैसा ही दर्द होता है। आप किसी भी जीव की हत्या करेंगे तो आपको भी नर्कों में काटा जाऐगा और फिर चौरासी में डालकर यातनाऐं दी जाती हैं। दूसरा यह कि आप कोई भी ऐसा नशा मत कीजिऐ जिससे बुद्धि पागल हो जाऐ और अपने-पराये की पहचान खत्म हो जाऐ। नशा मानव की बुद्धि को खराब कर देता है। यह आध्यात्म के मार्ग की बाधा है। &lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;संदेश सुनाने के बाद सभी को ध्यान-भजन पर बैठाया गया। आज&amp;nbsp; इस आध्यात्मिक मेला क्षेत्र से वापस अपने घरों की ओर जाने वालों का सिलसिला आरम्भ हो गया है। लोग अपने-अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। गुरू महाराज सभी को दर्शन दे रहे हैं। कार्यक्रम 27 जुलाई तक चलेगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;jaigurudevnews@yahoo.com&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;www.jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=699</link><pubDate>Mon, 26 Jul 2010 01:55:45 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="color: rgb(255, 0, 0); font-weight: bold;"&gt;&lt;img style="width: 229px; height: 259px;" src="http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/jgdfiles/Images/kafila_photos/7_24_2010___10__33__40___PM.JPG"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;font size="5"&gt;&lt;span style="color: rgb(85, 0, 0); font-weight: bold;"&gt;गुरूपूर्णिमा विशेष&lt;/span&gt;&lt;/font&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज पावन गुरूपूर्णिमा पर्व है
और सत्संग कार्यक्रम का पांचवा दिन है। आज इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में
आने वाले लोगों का अपार जनसमूह यहां सत्संग मैदान में उपस्थित है। सत्संग
मैदान पूरा भरा हुआ है। जितनी उपस्थित सत्संग मैदान में है उससे अधिक बाहर
है और उससे अधिक मेला कैम्पों में है। भारी भीड़ यहां बराबर आ रही है। गुरू
पूर्णिमा पर आऐ ये गुरू के मतवाले लोग गुरूदर्शन के लिए लालायित हैं।
दूर-दूर से आने वाले ये सत्संगी प्रमी&amp;nbsp; अपने-अपने जिलों व प्रान्तों के
क्ैम्पों में ठहरे हुऐ हैं। सभी जिलों के भण्डारे चल रहे हैं। आज पर्व है
इसलिए सभी जिलों में आज पक्का भोजन बन रहा है। &lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;मन्दिर में बराबर पूजा चल रही
है। आने वाले लोग अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार पूजा करके प्रशाद ग्रहण कर
रहे हैं। आज भी लोग आ रहे हैं और सत्संग सुनकर प्रशाद ग्रहण कर रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज प्रातः 6 बजे नामयोग मन्दिर
के प्रांगण में बने भव्य सत्संग मंच से बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने अपने
संदेश में कहा कि उस मालिक ने आपको मनुष्य शरीर दिया है ताकि आप भजन कर
लें। पर आपने इस अनमोल शरीर को दुनियां के कामों में लगा दिया। संसार के
काम उतने करो जितने इस शरीर रक्षा के लिए जरूरी हों शेष अपने अनमोल समय को
अपनी जीवात्मा के कल्याण में लगाकर इसे जगा लो और इसे यहां से निकालकर
इसके अपने देश, सत्तदेश पहुंचा दो। यह समय आपको फिर दोबार नहीं मिलेगा।
आपको जो स्वांसे मिली हैं उन्हें भजन में लगा दो।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;तुम यहां जब से आऐ हो तब से
यहां से निकल नहीं पाऐ हो। काल के जाल में फंसकर तुम अपनी सुध-बुध खो बैठे
हो। जीवात्मा यह प्रश्न अपने मालिक, गुरू से करती है कि आपने यहां मुझे
क्यों भेजा और अब क्यों लेने आऐ हो। इस पर मालिक बताते हैं कि काल भगवान
ने हमारी सेवा बहुत भारी की जिसके वशीभूत हम प्रसन्न हो गऐ और उसने हमसे
एक वर मांग लिया। हमने उसे उसकी सेवा के फलस्वरूप तुमको दान में दे दिया।
उसने अपनी एक अलग सृष्टि का निर्माण किया जिसमें उसने पाप-पुण्य के नियम
बनाकर आपको मनुष्य शरीर में कर्म करने की आजादी दे दी। तुम उसके कर्मों के
बन्धन मंे फंसते चले गऐ और आज इतने भारी कर्मों से लद गऐ कि अब आपके अन्दर
यह ताकत नहीं है कि आप बिना महापुरूषों के इन बन्धनों से आजाद हो जाओ। &lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;सुरत कहती है कि आप अब हमें
लेने क्यों आऐ हो ? तो गुरू कहते हैं कि जब उस परमात्मा ने यह देखा कि काल
कर्मों का बन्धन बनाकर तुमको यहां भारी सजा देता है, बारबार जन्माता है और
बारबार मारता है और फिर यहां से निकालकर आपके कर्मानुसार आपको नर्कों में
भयंकर यातनाऐं और सजा देता है और फिर वहां से निकालकर आपको चौरासी लाख
योनियों में डालता है जहां फिर से बेजुबानों को सजा और यातनाऐं देता है तो
अब हमसे यह देखा नहीं गया और हम अब तुम्हें लेने आऐ हैं। अब तुम यहां से
चलने की तैयारी करो और जो रास्ता हम बता रहे हैं उस रास्ते से चलो। सुरत
पूछती है कि इस बात का क्या भरोसा है कि आप हमें फिर से काल के हाथ नहीं
सौंपोगे ? तो गुरू कहते हैं कि अब यह मौज नहीं होगी। एक बार तुम हमारा कहा
मानकर यहां से निकल चलो तो अब दोबारा तुम्हें यहां नहीं भेजेंगे।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;यह काल का देश है और आप और हम
यहां काल के जाल में फंसे हुऐ हैं। महात्मा आकर हमें जगाते हैं और बताते
हैं कि यह देश हमारा नहीं है यह काल का देश है और यहां का कोई सामान हमारा
नहीं है। यहां जिसे आप अपना कहते हो वह सब तो पहले से ही उस ईश्वर ने आपके
लिए यहां भेज दिया था। जब इन सामानों को आप साथ नहीं ले आऐ तो यहां से
कैसे ले जा सकते हो ? इस लिए आप भजन का रास्ता लेकर भजन करो और यहां से
गुरू की दया से निकल चलो। आज गुरू पूर्णिमा का पावन पर्व है। गुरू की दया
लेकर आज से ही भजन-ध्यान आरम्भ कर दें। यह प्रण करें कि आज से बराबर
ध्यान-भजन करेंगे।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;गुरू महाराज का आदेश है कि आप
सब एक आदमी कम से कम सौ आदमियों को यह बताऐ कि आप शाकाहारी हो जाओ और किसी
नशे की वस्तु का सेवन न करें जिससे कि बुद्धि पागल हो जाऐ और अपने पराये
की पहचान खो जाऐ। यह आपका सहयोग है सतयुग आगवन का। आप सभी को इस आदेश का
पालन करना है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;सत्संग के बाद गुरू महाराज&amp;nbsp; ने नामदान दिया। यहां आने वाले लाखों नर-नारियों ने नामदान लेकर साधना प्रारम्भ कर दी है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;jaigurudevnes@yahoo.com&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;www.jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;

</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=698</link><pubDate>Sat, 24 Jul 2010 22:34:54 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;div style="text-align: center; color: rgb(255, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;&lt;img src="http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/jgdfiles/Images/kafila_photos/7_23_2010___9__47__00___PM.JPG"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170); font-weight: bold;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;font size="4"&gt;&lt;span style="color: rgb(85, 0, 0); font-weight: bold;"&gt;गुरूपूर्णिमा विशेष&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;/font&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज गुरूपूर्णिमा पावन पर्व का चौथा दिन है। भारी जनसमूह आज मेलाक्षेत्र में उपस्थित है और अब भी लोगों के आने का सिलसिला जारी है। रेलवे स्टेशन और बस अड्डे से आने वालों की पंक्ति टूट नहीं रही है। यह सिलसिला दिन-रात जारी है। नामयोग साधना मन्दिर मंे कल सायंकाल से गुरू महाराज के आदेश पर पूजा आरम्भ हो गई है। गुरू की दया का प्रशाद वितरण हो रहा है। सभी आने को सूचित किया गया है कि आप मन्दिर में जाकर अपनी कर्मों की माफी मांगों और वादा करो कि आज से शाकाहारी रहेंगे और किसी नशे का पान नहीं करेंगे। &lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज प्रातः 6 बजे गुरू महाराज ने अपने पावन संदेश मंे सुनाते हुऐ कहा कि पांच तत्वों का यह आपको शरीर दिया गया है। इसी में पांच तत्व पूरे हैं। जिन शरीरों में तत्व पूरे नहीं हैं उनमें साधना नहीं हो सकती। आपको यह अवसर प्रदान किया गया है कि आप पूरे तत्वों के इस शरीर में रहकर परमात्मा को प्राप्त कर सकते हो तो आपको इस अवसर से लाभ ले लेना चाहिऐ।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;जीवात्मा जब यहां से साधना के द्वारा निकलकर ऊपर के लाकों में जाती है तो वहां उसे एक से एक सुन्दर लोक देखने को मिलते हैं। वहां जो आनन्द हैं वो यहां कहीं भी नहीं है। जीवात्मा उस सुन्दरता और आनन्द को देखकर मस्त हो जाती है और फिर उसका मन यहां संसार के किसी सामान में नहीं लगता है। वह बारबार उन्हीं मण्डलों में जाना चाहता है। साधना के द्वारा जीव जैसे-जैसे ऊपर चढ़ाई करता है तो उसे और बड़े-बड़े मण्डल मिलते हैं। इसी क्रम में वह अपने घाम जहां न जीना है न मरना है वहां पहुंचता है। बिना गुरू के यह असम्भव है। &lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आप शाकाहारी रहिऐ। किसी भी पशु-पक्षी के मांस का सेवन न कीजिऐ। जैसे आप देखते हो कि कभी बच्चा चला गया कभी पिता चला गया, कभी मां चली गई तो कभी भाई चला गया। जब शरीर में से जीवात्मा निकल गई तो वह तो खोल रह गया। आप उसे ले जाकर जला देते हो या गड्ढा खोदकर दबा देते हो। फिर घर आकर आप स्नान करते हो कि अशुद्ध हो गया। कपड़े धोते हो। घर को, चारपाई को बिस्तर को धोते हो। अरे! यह तो आपका बेटा ही था ! जिसे आप गोद में उठाकर चूमते थे, अपने पास रखते थे, अपने साथ खिलाते-पिलाते थे। फिर अब क्या हुआ ? अब क्यों अशुद्ध हो गया ? आपने कहा कि वह तो मुर्दा हो गया तभी तो उसे लेजाकर जला दिया। पर आप पढ़े लिखे हो तो आपने यह नहीं सोचा कि जिस पशु-पक्षी को, जल के जीव को आप मारकर मुर्दा कर देते हो तो उसे आप अपने पेट में रख लेते हो! आपने यह क्या किया ? आपने तो अपने पेट को कब्रीस्तान बना दिया ! अरे यह भी तो किसी का बेटा था, यह भी तो जीव था जिसे आपने मुर्दा कर दिया। अपने बेटे को तो मरने पर आप जला आऐ और दूसरे के बेटे को मारकर अपनी रसोई में पकाकर और अपने ही पेट में रख लेते हो। आप तो जिन्दा कब्रीस्तान बन गऐ। आपकी पढ़ाई-लिखाई किस काम की कि आप यह भी न बुद्धि से सोच पाऐ कि मुर्दे को पेट में नहीं कब्रीस्तान में रखते हैं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आपके घर में कोई मांस का टुकड़ा डाल दे तो आप उससे लड़ते हो मारते हो, कहते हो कि हमारा घर अशुद्ध कर दिया। आप उसे मार डालते हो। पर आपने अपनी बुद्धि से यह नहीं सोचा कि यह पांच तत्वों का शरीर भी तो किसी का घर है। यह उस ईश्वर ने आपको मकान किराये पर दिया है और आपने उसके इस मकान में मुर्दे जमा कर लिए। वो इस मकान का मालिक क्या आपको छोड़ देगा ? वह तो आपको नर्कों में लेजाकर मार मारेगा कि आपको बचाने वाला कोई नहीं होगा। &lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बच्चों ! यह सब इसलिए हो गया कि आपने महात्माओं के पास जाना छोड़ दिया। आपने अपनी बुद्धि को बड़ा मानकर सब बर्बाद कर डाला। महात्मा आपको बुरे कामों से बचाते रहते हैं। पर आपने तो वहां जाना छोड़ दिया इस लिए आप कर्मों की गन्दगी से दबते चले जा रहे हो। आप शाकाहारी हो जाओ। और कोई नशा जो बुद्धि को पागल कर दे मत करो। रास्ता आपको दे रहा हूं अब आप बुरे कामों को छोड़ दो और जो समय बचा है उसमें अपनी जीवात्मा को साधना के द्वारा जगालो।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;सत्संग के बाद गुरू महाराज ने नामदान दिया।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;jaigurudevnews@yahoo.com&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;www.jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;
</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=697</link><pubDate>Fri, 23 Jul 2010 21:48:36 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;font style="color: rgb(255, 0, 0);" size="4"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;गुरूपूर्णिमा विशेष&lt;/span&gt;&lt;/font&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;font size="4"&gt;
&lt;/font&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज पावन गुरूपूर्णिमा कार्यक्रम
का तीसरा दिन है। विभिन्न प्रान्तों और जिलों के सत्संगी प्रेमी भारी
संख्या में बराबर आ रहे हैं। सत्संग मैदान आज तीसरे दिन पूरा भर गया था।
मैदान में जितने लोग सत्संग श्रवण कर रहे थे उस से अधिक बाहर कैम्पों में
उपस्थित थे। मैदान का दृश्य यह था कि जहां देखो रंग-बिरंगे पारम्परिक
वेशभूषा में लोग बैठे थे जैसे सत्संग मैदान में लघु भारत हो। आने वाले
लोगों की संख्या बराबर बढ़ रही है। दिन-रात लोग रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड
से बराबर आ रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज प्रातः 6बजे बाबा जयगुरूदेव
जी महाराज ने अपने सत्संग संदेश में कहा कि उस ईश्वर ने आपको मनुष्य शरीर
दिया है कि आप भजन-ध्यान करके इसके अन्दर दोनों आंखों के पीछे जो आत्मा
बैठी है उसे जगाकर इसके अपने घर पहुंचा दो। इसके लिए आपको महात्माओं की
खोज करनी होगी। बिना महापुरूषों के कोई पार नहीं जा सकता है। आप यहां
संसार में आकर फंस गऐ। आपने महात्माओं के पास जाना छोड़ दिया। उनकी
शिक्षाओं से दूर हो गऐ इसीलिए नैतिकता, सदाचार, शिष्टाचार, धर्म-कर्म सभी
नष्ट हो गया। संस्कार आपमें ही जब अच्छे नहीं हैं तो आप आगे बच्चों को
क्या संस्कार दोगे।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आपने कभी सोचा है कि जिस&amp;nbsp; ईश्वर
ने आपको बनाया है उसी ने पशु-पक्षियों को भी बनाया है। आप बिना विचारे इन
पशु-पक्षियों को मार कर खा जाते हो तो क्या वो आपको माफ करेगा ? अरे! जब
शरीर से जीवात्मा शरीर से निकल जाती है तो शरीर गिर पड़ता है, उसे लोग
मुर्दा कहते हैं। मुर्दे को आप क्या घर में रखते हो ? जब कोई मर जाता है
तो तुम लोग उसे जला देते हो या गाड़ देते हो पर आपने तो अपनी बुद्धि को
लगता है ताक पर रख दिया। आप कैसे मरे हुऐ मुर्दे को अपने पेट में रखते हो
यह आपने कभी विचार किया ? तुमने अपने पेट को शमशान बना लिया। कहां गई आपकी
बुद्धि ? इसका बहुत भारी दण्ड मिलेगा वह नर्कों और फिर चौरासी में बार-बार
काटेगा और जलाऐगा। कितने ही वर्षों तक आपको वहां यातनाऐं देगा और आप वहां
रोते-चिल्लाते रहोगे, कोई बचाने वाला नहीं होगा। उसके बाद आपको वहां से
निकालकर चौरासी में डालेगा। कीट-पतंगा, पशु-पक्षी आदि बनाऐगा तब आप काटे
जाओगे। इसलिए आपको शाकाहारी रहना होगा। किसी प्रकार का नशा मत करो जिससे
बुद्धि खराब हो जाऐ और अपने-पराये का बोध जाता रहे। मां, बहन, बेटी पत्नी
में फर्क खत्म हो जाऐ। समय खराब है और थोड़ा है। अब आप भजन करके जल्दी से
अपनी आत्मा को जगाकर इसे इसके अपने घर पहंुचा दो।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;सत्संग के बाद गुरू महाराज ने आने वाले सभी जीवों को नामधन से सराबोर कर दिया। &lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;jaigurudevnews@yahoo.com&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;www.jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;

</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=696</link><pubDate>Fri, 23 Jul 2010 04:14:23 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;img style="color: rgb(0, 0, 255);" src="file:///C:/DOCUME%7E1/jay/LOCALS%7E1/Temp/moz-screenshot.png" alt=""&gt;&lt;span style="color: rgb(255, 0, 0); font-weight: bold;"&gt;&lt;img src="http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/jgdfiles/Images/kafila_photos/7_22_2010___1__20__21___AM.jpg"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 255); font-weight: bold;"&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;font style="color: rgb(85, 0, 0);" size="4"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;गुरूपूर्णिमा विशेष&lt;/span&gt;&lt;/font&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;font size="4"&gt;
  &lt;/font&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;मथुरा के मधुवन क्षेत्र में 
स्थित नामयोग साधना मन्दिर पर होने वाले वार्षिक पावन गुरूपूर्णिमा पर्व का
 आज दूसरा दिन है। देश के विभिन्न प्रान्तों एवं जिलों से आने वाले 
प्रेमियों का सैलाब यहां उपस्थित है। चारों दिशाओं से आने वाले यह प्रेमी 
इस पावन कार्यक्रम में यहां लघुभारत की झांकी प्रस्तुत कर रहे हैं। 
भक्तिभावना से लबालब ये गुरू प्रेमी अपने गुरू के दर्शन के लिए आतुर हैं। 
लगभग 10 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले इस कार्यक्रम क्षेत्र में सभी भाषा 
भाषी और पहनावे आपको देखने को मिल सकते हैं। यहां आकर नाम की साधना करने 
वाला यह जनसमूह कलयुग में अद्भु&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;त मिसाल पेश कर रहा है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;विभिन्न प्रान्तों एवं जिलों के 
कैम्पों में वहां के प्रेमीयों के द्वारा सेवाओं का प्रतिपादन किया जाता 
है। सभी प्रेमी सामूहिक सेवाओं का आयोजन गुरू आदेश पर करते हैं। जिलों के 
भण्डारे चल रहे हैं। इन भण्डारों में कोई भी व्यक्ति आकर भोजन पा सकता है। 
यहां सेवा भाव से ये प्रेमी आने वालों को भोजन कराते हैं। इन भण्डारों में 
केवल एक बात का प्रतिबन्ध है कि आप भोजन उतना ही लें जितना कि आप पूरा खा 
सकें और आपकी पत्तल में भोजन का अंश न बचे। इसके पीछे यह सार्थक तर्क है कि
 ऐसे कठिन समय में जबकि देश में लाखों लोगों को एक वक्त का भोजन भी मुश्किल
 से मिलता है तो भोजन लेकर फिर उसे बचाकर फैंकना उस परमात्मा की दृष्टि में
 दोषपूर्ण है। हम भोजन भरपेट करें किन्तु उतना ही लें जितना कि हम खा सकें 
तो अन्न की बर्बादी नहीं होगी और वही अन्न किसी और की क्षुदा शान्त करने के
 काम आऐगा। ऐसी मिसाल ये प्रेमी बाबा जयगुरूदेव जी&amp;nbsp; महाराज की प्रेरणा से 
प्रस्तुत कर रहे हैं। यदि इसी नियम से सभी देशवासी चलें और अन्न की बर्बादी
 न करें तो निःसंकोच देश में बहुत से भूखे पेटों की क्षुदा शान्त करने का 
सामान हो जाऐगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज प्रातः 6 बजे बाबा जयगुरूदेव 
जी महाराज ने नामयोग साधना मन्दिर के पीछे बने सत्संग मंच से अपना 
आध्यात्मिक संदेश प्रेमियों को सुनाया। अपने संदेश में गुरू महाराज ने कहा 
कि नर तन पाकर इससे संसार की कामना कर रहे हो किन्तु यह याद नहीं कि एक दिन
 यह छोड़कर जाना है। उस मालिक ने बड़े भाग्य से यह शरीर दिया है इसमें पांचों
 तत्व पूरे हैं। इसी मनुष्य शरीर से ही दोनों आंखों के पीछे से अपने घर 
जाने का रास्ता गया है जिसे केवल महात्मा ही बता सकते हैं। आपको न तो लगन 
है न ही करना चाहते हो। यदि महात्मा घेर-घार कर दे भी देते हैं तो आप उसे 
ताक पर रख देते हो उसकी कद्र नहीं करते। कितने ही लोग आऐ और चले गऐ ऐसे ही 
अब जिसका समय पूरा होगा उसे भी जाना होगा। यहां दुनियां के सामान आपको जो 
दिऐ गऐ हैं वे सभी इस लिए आपको दिऐ गऐ हैं कि आप उनसे काम ले लो और जब जाने
 लगो तो यहां का सामान यहीं छोड़ दो। ये सामान आप क्या अपने साथ लाऐ थे ? 
अरे! यहां भी जो आप देखते हो वह कुछ भी साथ जाने वाला नहीं है। समझदारी से 
काम करो और थोड़ा भजन कर लो। पहले जो समय था वह तो गया अब जो बचा है वह भी 
जल्दी चला जाऐगा। अब थोड़ा समय बचा है भजन करके अपनी जीवात्मा को जगा कर उसे
 उसके अपने घर पहंुचा दो। पर आप लगे हो संसार को बटोरने में। सत्संग में 
अगर पत्नी आ गई तो पती लड़ता है कहता है कि देखता हूं कैसे जाती है। पती 
जाता है तो पत्नी लड़ती है। पत्नी चली गई थाने में और लिखा दिया कि हमें 
मारा। बस हो कर दिया मुकदमा। आज सौ फीसदी झूठे मुकदमें हैं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;भजन करने के लिए आऐ हो तो भजन के
 लिए लगन पैदा करो। यदि भजन नहीं किया और यूं ही चले गऐ तो यह मनुष्य शरीर 
फिर नहीं मिलेगा। जगे हुऐ महापुरूषों की खोज करो और उनसे रास्ता लेकर जल्दी
 से भजन कर लो।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;jaigurudevnews@yaho.com&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 255);"&gt;www.jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;

</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=695</link><pubDate>Thu, 22 Jul 2010 01:22:42 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;img src="http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/jgdfiles/Images/kafila_photos/7_20_2010___11__19__51___PM.jpg"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;div style="text-align: center; color: rgb(255, 85, 0); font-weight: bold;"&gt;&lt;font size="4"&gt;गुरू पूर्णिमा विशेष-1&lt;br&gt;&lt;/font&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;पावन गुरूपूर्णिमा वर्ष 2010 का
सत्संग कार्यक्रम मथुरा में नामयोग साधना मन्दिर के प्रांगण में आरम्भ हो
गया है। आज पहले दिन जन सैलाब सत्संग मैदान में उपस्थित है। विभिन्न
प्रान्तों एवं जिलों से आऐ सत्संगी प्रेमी भक्तिभावनाओं व सेवा की भावनाओं
से ओत-प्रोत हैं। रातभर और अब दिन में भी आने वाले ये प्रेमी बराबर आ रहे
हैं। यहां का दृश्य ऐसा प्रतीत होता है जैसे एक स्थान पर गुड़ रखा है और
चारों दिशाओं से चींटीयां चली आ रही हैं। रेलवे स्टेशन व बस अड्डें से
बराबर जन सैलाब उमड़ रहा है। अपने-अपने वाहनों से भी आने वाले लोगों की
संख्या कम नहीं है। यहां सभी प्रान्तों एवं जिलों के कैम्प लगाऐं गऐ हैं
जिन्हें देखकर ऐसा लगता है कि सम्पूर्ण भारत मथुरा के इस नामयोग साधना
मन्दिर में उमड़ पड़ा हो।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज प्रातः 6 बजे बाबा जयगुरूदेव
जी महाराज ने गुरूपूर्णिमा के पावन पर्व का पहला सत्संग सुनाया। महापुरूष
गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज के जीवन का अनूठा उदाहरण देते हुऐ गुरू
महाराज ने बताया कि उनको परमात्मा के मिलने की चाह तो थी किन्तु वे कहते
हैं कि वे अज्ञानी थे, कुछ नहीं जानते थे। अपनी लगन और मेहनत के फलस्वरूप
उन्हें कंज गुरू से नाम का रास्ता मिल गया और उन्होंने साधना आरम्भ की और
एक दिन अपनी मेहनत और लगन का फल उनको मिल गया। उन्हें अन्तर में दिखाई
सुनाई देने लगा और इस प्रकार उनकी आध्यात्मिक यात्रा आरम्भ हो गई और
अन्ततः उन्हें परमात्मा का दर्शन दीदार हो गया।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;गोस्वामी जी के इस वृतान्त को
सुनाकर जीवों को चेताते हुऐ गुरू महाराज ने कहा कि इसी प्रकार आप भी यदि
साधना करोगे तो आपको भी परमात्मा का दर्शन दीदार हो जाऐगा। पर आप संसार
में आकर फंस गऐ।&amp;nbsp; और अब इसे ही अपना घर समझने लगे और यहां के सामानों को
अपना समझने लगे। याद रखो कि जब तुम आऐ थे तो कुछ नहीं लेकर आऐ थे। जो भी
सामान आप देख रहे हो वे सभी यहीं थे और आपके जाने के बाद भी यहीं रहेंगे।
ये सामान तो आपको इस लिए दिऐ गऐ हैं कि आप अपने जीवन काल में इनसे अपना
काम कर लो और जब जाने लगो तो यहीं छोड़ दो।&lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;मथुरा :2 अपै्रल 1974&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;मथुरा में 2 अपै्रल 1974 को
बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने भारतवासियों को सचेत किया और कहा कि आज के
स्वार्थी प्रजातंत्र में सदाचार और सत्य दया प्रेम व नैतिक चरित्र नाम
निशान को दिखाई नहीं देगा। आध्यात्मिकवाद तो कहां से आऐगा ? शराब, मांस,
अण्डों की भरमार हो वहां भौतिक मोरल है ही नहीं। खुशहाली, खुदगर्जी की है।
वास्तव में गरीबी छा गई है। आठ जनवरी को फरूर्खाबाद कम्पिल ग्राम में
विशाल जनसमूह में बाबा जी ने सचेत किया और कहा कि आप बुरे कामों को जैसे
आन्दोलन, हड़ताल, तोड़फोड़ चोरी, डकैती, खेत काटना, कत्ल करना, मांस-मदिरा
आदि व्यसनों को छोड़ें जो मन, बुद्धि को नष्ट कर काम, क्रोध की मात्रा
बढ़ाकर इन्द्रियों विषयों में लग जाती है। धर्मकर्म के तराजुओं पर बैठ
जावें। धर्म की शिक्षा मानव सुधार के लिए अति जरूरी है। आत्म कल्याण तभी
होगा जब नैतिक सुधार होगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;समय खराब आ रहा है। एक हजार
तोला सोना बीस रूपये तोला चांदी पचास रूपये बोरी सीमेन्ट 200 रूपया खाद की
एक बोरी दस रूपया किलो चना, जौं, मटर, मिर्च, गेहूं, चावल, पांच रूपया
लीटर पैट्रोल, 10 रूपया लीटर डीजल, 15 रूपया लीटर मोबीआयल अन्य सामान आज
से सौ गुने महंगे होंगे।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;चार खरब का टैक्स फरवरी से
सैन्टर का लगेगा प्रान्त का अलग से। सेठ-साहूकारों का महंत का अलग से
कर्मचारियों का अलग से कुल दस खरब का टैक्स लगेगा। आप किसानों के चिथड़ें
उड़ जाऐंगे किसानों को ही चुकाना है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जी ने कहा कि अबकी दिल्ली
के चुनाव में सब बुद्धिजीवी और गैर बुद्धिजीवी मत डालें, डलवायें। दिल्ली
के पुराने एम.पी. जनों को निकाल बाहर करें। नये लोगों को मौका दें ताकि
देश की सेवा का सबको अवसर मिले। जिसका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है नाम
चढ़वा लें। वोट सबको देना है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;jaigurudvnews@yahoo.com&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;www.jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;

</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=694</link><pubDate>Tue, 20 Jul 2010 23:22:11 GMT</pubDate></item><item><title>जयगुरूदेव समाचार</title><description>&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;img src="http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/jgdfiles/Images/kafila_photos/7_20_2010___6__04__33___AM.jpg"&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;br&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp; आज प्रातः बाबा जयगुरूदेव जी
महाराज ने 6 बजे सत्संग मंच से सत्संग दिया। अभी कार्य के आरम्भ होने में
एक दिन शेष है किन्तु मैदान में भारी भीड़ उपस्थित थी। अपने संदेश में गुरू
महाराज ने कहा कि जब तक मन यहां से उचटकर वहां उस सुरत के साथ नहीं लगेगा
तब तक साधना का काम बनना कठिन है। सभी को जिनको नामदान मिल गया है उन्हें
चाहिए कि रोज बिना नागा सुबह-शाम सुमिरन, ध्यान, भजन अवश्य करें। यहां इस
संसार में आप रहते हो और संसार की वस्तुओं में फंसे हो तभी परेशान हो। जब
संसार से मन दुखी होता है तो आपको महात्मों की शरण में जाना ही होगा। बिना
महात्माओं के आपको कोई इस मुसीबत से नहीं बचा सकता। पर आप महात्माओं के
पास आकर भी संसार मांगते हो तो क्या लाभ है। महात्मा आपको इस दुख के संसार
से निकालने के लिए ही काम करते हैं कि चलो अपने घर वापस और अब इस दुखों के
संसार में नहीं आना है। पर आप महात्माओं के पास आकर भी दुख के सामान
मांगते हो तो यह आपकी भारी भूल है। आपको अपने प्रारब्ध और उस ईश्वर पर
भरोसा होना चाहिए। आपके भाग्य में जो कुछ उसने आपके कर्मानुसार लिख दिया
है वह समय-समय पर आपको मिलेगा ही। बस आप संतोष&amp;nbsp; रखो। जब वासनाऐं अधिक बढ़
जाती हैं तो दुख पैदा होने लगते हैं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;यहां के जन्म-मरण से छूटने के
लिए यह जीवात्मा अपने मन से फरीयाद करती है कि हे मन! तू मेरा एक कहा मान
ले। मैं जन्म-जन्म से तेरी दासी हूं और तू मेरा स्वामी है। मैं सदा तेरी
बात मानती हंू और अब तू मेरी एक बात मान ले कि जहां का तू राजा है और सब
तेरे गुलाम हैं वहां चल और अपना राज कमा। मैं उससे आगे वहां चली जाउं जहां
स्वामी मेरा है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;गुरू महाराज ने सुरत-स्वामी
संवाद सुनाते हुऐ कहा कि यहां से मन को पलटकर वहां सुरत के साथ लगा कर
साधना करोगे तभी जीवात्मा को रास्ता मिलेगा। इसलिए जब भी साधना में बैठो
तब मन, बुद्धि, चित्त को सुरत के साथ रोककर बैठो। मन भागता है तो उसे
पकड़कर लाओं और सुरत के साथ लगाओ। फिर भागेगा तो फिर लाओ। बार-बार भागेगा
तो बार-बार लाओ और सुरत के साथ रोककर साधना में मन लगाकर देखो, सुनो। कुछ
दिन मंे ही तुम्हारी आंख-कान खुल जाऐंगे। &lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;भारी भीड़ आ रही है। लोग रोज ही आश्रम पर सत्संग के लिए आ रहे हैं। बहुत से प्रान्तों के भण्डारे आने लगे हैं।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;div style="text-align: center; color: rgb(85, 0, 0);"&gt;&lt;font size="4"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;बीते हुऐ दिन (राजस्थान दौरा 1974)&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;/font&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;अपने राजस्थान दौरे में बाबा
जयगुरूदेव जी महाराज ने धर्मकर्म का संदेश सुनाते हुऐ कहा कि देश में
नर-नारी और बच्चे अपनी-अपनी बुराइयों को छोड़ रहे हैं और अच्छाइयों को
ग्रहण कर रहे हैं उन्हें न तो अच्छाई का ज्ञान था और न बुराई का ज्ञान था।
उनको लिखा-पढ़ाकर मैंने उन्हें सभी बातों का बोध कराया। आपने अगर ऐसा समय
का उपयोग न किया तो आपका जीवन बेकार चला जाऐगा। जगह-जगह अनेक प्रान्तों
में लोग इस संदेश को सुनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। गांव-गांव और
कस्बों-कस्बों मंे लाखों-लाखों की भीड़ हो रही है। मनुष्य शरीर एक किराये
का मकान है जो थोड़े दिनों के लिए ही तुम्हें मिला था। जिनका संबंध
महात्माओं से हो गया है उनकी वे रक्षा करेंगे। शरीर तो जिसका है वह तो ले
ही लेगा किन्तु जीवात्मा का काम कर दिया जाऐगा जिससे वो चौरासी-नर्कों एवं
आवागमन के चक्कर से मुक्त हो सके।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;यह जीवात्मा आंखोें के पीछे
बैठकर परमात्मा का दर्शन किया करती थी। बाहर के विषय-विकारों ने इसकी
शक्ति को नष्ट कर दिया। इसमें अब इतना बल नहीं है कि यह अपना जागरण करे।
अतः सहारा लेना पड़ेता है। भौतिक वस्तुओं के लिए भी किसी न किसी का सहारा
लेना पड़ता है। जब महात्मा का सहयोग मिलेगा तब यह जहां से आई है वहां पहुंच
सकेगी। महात्माओं के संग से ही नामधन मिलेगा जिसे पाकरके तुम उस महाप्रेम,
महाआनन्द के स्थान में पहुंच जाओगे।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज भारत के करोड़ों आदमी इस बताऐ
हुऐ मार्ग पर चलने लगे हैं। कितने लोगों का दिव्य नेत्र खुल गया और कितने
लोगों को वेदवाणियां, आकाशवाणियां प्रतिक्षण सुनाई पड़ती रहती हैं। इस
रहस्य को साधना करने वाले ही जानते हैं। जिन स्त्री-पुरूषों ने नामदान
लिया और चौबीस घण्टे में से दो-ढाई घण्टा समय बचाकरके साधन-भजन में लगे
रहते हैं उन्हें अनुभव अवश्य होता है। वे चिट्ठियां लिखते हैं कि महाराज
स्वर्गलोक में, बैकुण्ठ लोक में, सूर्य लोक में बहुत आनन्द मिलता है और
इच्छा नहीं होती है कि मृत्युलोक में वापस जाऐं। इन लोकों में इतना प्रकाश
है कि जिसके आगे ये सूरज कुछ नहीं। तुम भी इस रास्ते को प्राप्त कर सकते
हो।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;आज देश में जन-जीवन त्रस्त हो
गया है। लोग कहने लगे हैं कि महाराज मंहगाई इतनी बढ़ गई है कि खर्चा चलाना
मुश्किल पड़ रहा है। जब रोटी नहीं मिलेगी तो भजन कैसे होगा। मैंने उनसे कहा
कि तुम महात्माओं के संपर्क में आओ तो वे तुम्हें बर्दाश्त करने की शक्ति
भी देंगे। एक वक्त खाना खाकर भी तुम मस्त रहोगे। जब राजा की नियत बिगड़ती
है तब यही हाल होता है। शासन करने वाले अपने विदेशी बैंकों को भरने में
लगे हैं उन्हें तुम्हारे दुख-दर्दों को सुनने की फुर्सत कहां है। मुसलमान
अच्छे थे। बादशाहों ने कुरान शरीफ की नकल करके टोपियां सिलकर के अपना
खर्चा चलाते थे लेकिन रैयत का पैसा अपनी औलाद पर खर्च नहीं करते थे जब
उनमें बदनियति आई तो उनका खात्मा होने लगा। अंग्रेजों ने 150 वर्षों तक
राज्य किया और जब प्रजा के रूपये का दुरूपयोग किया तो उन्हें भी शासन
छोड़ना पड़ा। आज के पचीस वर्षों में ही इनका तख्त हिल गया। जितना कत्लेआम इन
पचीस वर्षों में हुआ उतना पहले कभी नहीं हुआ। जन-जीवन अस्त’-व्यस्त हो
गया। जनता दाने-दाने को मोहताज हो गई&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;उत्तरप्रदेश के चुनाव में बाबा
जी की आवाज पर नऐ चेहरे अधिक आये। 424 लोगों में से 114 पुराने तथा तीन सौ
नऐ आऐ। ये एम.पी. तो दिल्ली में बैठे हुऐ हैं उन्हें जब अपने स्थानों को
छोड़ देना चाहिऐ और बच्चों को दे देना चाहिऐ। बहुत से स्थानों पर वोट नहीं
पड़े थे परन्तु सब बक्सों को एक साथ मिलाकर डाला गया क्योंकि इस बात का पता
न चल सके कि वोट नहीं पड़ा है। बाबा जी एक साल चार महीने के अन्दर अपना
कार्य पूरा कर देंगे। जिनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है उन्हें अपना नाम
मजिस्टेªट के यहां लिखाना होगा और सभी को 1976 में मतदान देना होगा।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जी ने बच्चों को सम्बोधित
करते हुऐ कहा कि तुम मांस मछली शराब मुझको दे दो और मैं तुम्हें तख्त ताज
दिला दूंगा। दिल्ली का ताज और तख्त बीस से तीस वर्ष के बच्चों के हाथ में
चला जाऐगा और एम.पी. और एम.एल.ए. निकाल बाहर कर दिऐ जाऐंगे। बच्चों के लिए
देश म्रे बीस करोड़ का प्लेटफार्म तैयार हो गया है। बाबा जी के द्वारा
बच्चों का परिक्षण एक प्रान्त में हो गया। इस वैचारिक क्रान्ति की लहर
चारों तरफ फैल रही है।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;बाबा जी ने आगे कहा कि जब तक
राज सत्ता बच्चों के हाथों में नहीं जाती है तब तक देश में फैली अव्यवस्था
और अशांति दूर नहीं होगी। बच्चे जब शासन में आ जाऐंगे तो ये अपनी कार्य
कुशलता और कर्तव्यनिष्ठा से जन-जन को सुखी कर देंगे।&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;jaigurudevnews@yahoo.com&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;info@jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;&lt;br style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;
&lt;span style="color: rgb(0, 0, 170);"&gt;www.jaigurudevworld.org&lt;/span&gt;

</description><link>http://jaigurudevworld.org/jaigurudevworld/info/JgdDiary.aspx?id=693</link><pubDate>Tue, 20 Jul 2010 06:05:56 GMT</pubDate></item></channel></rss>