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27 Oct 2009
Date : 26-Oct-2009
सवाल
सवाल जवाब अरविन्द जी आपने पूछा है कि भजन में तरक्की किस प्रकार से हो ?
जवाब
भजन के रास्ते में तरक्की हो इसके लिए प्रयास यही होना चाहिऐ कि इन्द्रियां विषयों के पीछे न दौड़ें, मन इन्द्रियों के बहकावे में न आवे तथा मन के ऊपर आत्मा का दबाव रहे ताकि जीवात्मा अपना कार्य करने के लिए एक औजार की तरह इस्तेमाल करे। आत्मा अभी मन की दासी की तरह काम कर रही है। और मन हुकूमत करता है। आत्मा को मन की दासी रहने के बदले फिर से उस पर अपना प्रभुत्व जमाना है। यह कार्य तभी होगा जब तुम एकाग्रचित्त होकर भजन-ध्यान करोगे। भजन में शब्द को सुनकर आत्मा बलवती होगी और मन वश मंे आने लगेगा। ‘शब्द’ अथवा ‘नाम’ संगीत का सागर है और आत्मा उसकी एक बंूद है। यह बंूद अपनी जाति में मिलना चाहती है और जब यह सागर में मिलने के बाद समुद्र का रूप धारण कर लेगी फिर उसे कोई बूंद नहीं कहेगा। इसलिए नियम से कम से कम दो घण्टा समय भजन में देना चाहिऐ तभी कुछ हो सकता है। चाह होगी, इच्छा बनी रहेगी तब यह काम आसान हो जाऐगा। news@jaigurudevworld.org
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