| Date : 10-Nov-2009 |
| सवाल |
| सवाल-जवाब
देवव्रत जी ! आपने पूछा है कि जीवन में आनन्द कैसे मिलता है ? |
| जवाब |
| आप आनन्द चाहते हो, अमन चैन चाहते हो, नर्कों और चैरासी की परेशानीयों से बचना चाहते हो तो ईमानदारी से बच्चों की सेवा करो और भजन करो। भजन में लगे रहोगे तो बंूद बंूद करके घड़ा भर जाता है फिर दरिया बन जाऐगा।
यह जमीन भारत भूमि महात्माओं से कभी खाली नहीं होती। महान शक्त्यिां इस भूमण्डल पर हमेशा रहा करती हैं। जब वे देखती हैं कि तुम अपने रास्ते को भूलकर कहीं और चले गऐ तो सामने आकर आवाज लगाती हैं। जीवात्मा सबमें हैं। उसपर कर्मों का कूड़ा-कचड़ा इकट्ठा हो गया। महात्मा कूड़ा-कचड़ा हटा देते हैं और जैसे आग के ऊपर राख जमी रहती है इसी तरह राख हटा दो आग घघक उठती है। इसी तरह से आग धधकने लगती है, बुद्धि जग जाती है फिर शुद्ध प्रेम सेवा सत्य और ज्ञान जाग जाता है।
मन में सेवा भाव होना चाहिऐ। जिसकी सेवा करोगे तो उसके दिल में तुम्हारे लिए दुआऐं निकलेंगी। पहले के लोग इसीलिए सुखी जीवन व्यतीत करते थे क्योंकि वे लोग गुरूओं, महात्माओं के सत्संग में जाते रहते थे और उनकी शिक्षाओं के अनुसार अपना जीवन बिताते थे। अब वे सब बातें छूट गईं इसीलिए परेशानियां लोगों की बढ़ गईं।
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